(फाइल फोटो के साथ)
नयी दिल्ली, 16 अक्टूबर (भाषा) रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड ने शुक्रवार को एलन मस्क की भारत के उपग्रह संचार क्षेत्र को लेकर सार्वजनिक आलोचना पर पहली बार प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि प्रतिस्पर्धी बाजार से ही पता चलता है कि ग्राहकों को बेहतर सेवा कौन देता है। कंपनी ने स्टारलिंक समेत सभी कंपनियों से प्रतिस्पर्धा का स्वागत किया, लेकिन साथ ही कहा कि हर कंपनी को भारतीय कानून का पालन करना होगा।
मस्क की हाल की टिप्पणियों का सीधे जवाब देते हुए कंपनी ने कहा कि वह ‘तथ्यों को रिकॉर्ड पर रख रही है।’ मस्क ने रिलायंस की आलोचना की थी और कहा था कि उपग्रह संचार क्षेत्र में अधिक प्रतिस्पर्धा से उपभोक्ताओं को फायदा होगा।
मुकेश अंबानी के नेतृत्व वाली कंपनी ने बयान में कहा, ‘‘रिलायंस ने कभी प्रतिस्पर्धा से डर नहीं माना है। हमारा मानना है कि प्रतिस्पर्धा से ही पता चलता है कि ग्राहकों को सबसे अच्छी सेवा कौन देता है।’’
कंपनी ने अपनी बात के समर्थन में जियो के प्रदर्शन का हवाला दिया। उसने कहा कि जियो ने 2016 में भारत के प्रतिस्पर्धा से भरे दूरसंचार बाजार में एक नई इकाई के रूप में कदम रखा था, तब उसका एक भी ग्राहक नहीं था। महज 10 साल में उसने 53 करोड़ से अधिक ग्राहकों का भरोसा हासिल किया और भारतीयों को दुनिया के सबसे अच्छे डिजिटल बुनियादी ढांचों में से एक तथा सबसे सस्ता डेटा उपलब्ध कराया।
बयान में कहा गया, ‘‘हम स्टारलिंक समेत उपग्रह संचार क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा का स्वागत करते हैं। जियो समेत हर कंपनी को भारत के लोगों की सेवा करनी होगी और देश के कानूनों तथा नीतियों का पालन करना होगा।’’
रिलायंस ने कहा कि भारत में घरेलू या अंतरराष्ट्रीय निवेश और नवाचार के लिए खुला माहौल कानून के शासन पर आधारित है।
कंपनी ने कहा, ‘‘हर भारतीय उद्यम की तरह रिलायंस भी ऐसे भारत में आगे बढ़ी है, जो लोगों के जीवन को बेहतर बनाने वाले घरेलू और अंतरराष्ट्रीय निवेश तथा नवोन्मेष का स्वागत करता है। यह खुलापन कानून के शासन पर आधारित है।’’
रिलायंस ने कहा कि सरकार के रुख के मुताबिक, भारतीय या विदेशी हर आवेदक के लिए समान प्रक्रिया अपनाई जाती है। उसने यह भी कहा, ‘‘जियो की अपनी उपग्रह सेवाएं भी मंजूरी का इंतजार कर रही हैं।’’
भारती एयरटेल के चेयरमैन सुनील मित्तल ने इस सप्ताह की शुरुआत में ‘ब्लूमबर्ग न्यू इकॉनमी फोरम’ 2026 में कहा था कि उनकी कंपनी के उपग्रह संचार उद्यम यूटेलसैट वनवेब भारत में सेवाएं शुरू करने की मंजूरी पाने के मामले में एलन मस्क की स्टारलिंक के मुकाबले काफी आगे है। उनकी टिप्पणी से भारत के उपग्रह इंटरनेट बाजार में नियामकीय मंजूरियों और प्रतिस्पर्धा को लेकर चल रहे सार्वजनिक विवाद में नया मोड़ आया।
स्टारलिंक और मस्क की हाल की टिप्पणियों को लेकर विवाद के बीच सरकारी सूत्रों ने स्पष्ट किया है कि भारत में कारोबार करने वाली हर कंपनी को देश के कानून का पालन करना होगा। केंद्र सरकार का रुख शुरू से स्पष्ट और एकसमान रहा है।
सूत्रों ने पहले कहा था, ‘‘सरकार का रुख बहुत स्पष्ट रहा है और कंपनियों के आवेदन के समय भी यही था कि अगर आप भारतीय कानून का पालन नहीं करते, तो यहां कारोबार नहीं कर सकते...। इसलिए यहां कारोबार करने के लिए भारतीय कानूनों का पालन करना होगा।’’
गौरतलब है कि मस्क ने आरोप लगाया है कि कुछ प्रभावशाली कारोबारी समूह भारतीय उपभोक्ताओं पर अपनी ‘एकाधिकार वाली मजबूत पकड़’ बनाए रखना चाहते हैं। हालांकि, संचार मंत्रालय ने इस आरोप को खारिज करते हुए कहा कि नियामकीय ढांचे या उसे लागू करने की प्रक्रिया को अनुचित या भेदभावपूर्ण बताने वाले सुझाव ‘निराधार और गलत समझ पर आधारित’ हैं।
संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी कहा कि मस्क की स्टारलिंक, रिलायंस की जियो सैटकॉम और भारती समर्थित यूटेलसैट वनवेब को उपग्रह संचार लाइसेंस मिल चुके हैं। अमेजन की प्रोजेक्ट कुइपर ने भी रुचि दिखाई है, लेकिन उसे तय प्रक्रिया का पालन करना होगा।
सिंधिया ने स्पष्ट किया कि सरकार के राजस्व आधारित शुल्क ढांचे को अंतिम रूप देने और अलग-अलग कंपनियों के सुरक्षा संबंधी मानदंड पूरे करने के बाद स्पेक्ट्रम आवंटित किया जाएगा। भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) और दूरसंचार विभाग (डीओटी) उपग्रह स्पेक्ट्रम की कीमत तय करने के मामले में फैसले के करीब हैं।
इस विवाद में लाइसेंस और परिचालन की मंजूरी के बीच अंतर समझना महत्वपूर्ण है। लाइसेंस मिलने का मतलब यह नहीं है कि कोई कंपनी तुरंत वाणिज्यिक सेवाएं शुरू कर सकती है। इसके लिए स्पेक्ट्रम आवंटन और सुरक्षा शर्तों को पूरा करना भी जरूरी है।
यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है, जब रिलायंस अपने डिजिटल सेवा कारोबार जियो प्लेटफॉर्म्स के आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) की तैयारी कर रही है। जियो ने 27 करोड़ तक नए शेयर की पेशकश के लिए 1,065 से 1,119 रुपये प्रति शेयर का मूल्य दायरा तय किया है। ये शेयर मौजूदा पूंजी का करीब तीन प्रतिशत हैं और निर्गम में बिक्री पेशकश (ओएफएस) का कोई हिस्सा नहीं है।
आईपीओ के लिए बोली 21 से 23 अक्टूबर तक लगाई जाएगी, जबकि बड़े (एंकर) निवेशक 19 अक्टूबर को बोली लगाएंगे। कंपनी का शेयर 28 अक्टूबर को बाजार में सूचीबद्ध हो सकता है।
भाषा निहारिका रमण
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