कोलकाता, 16 अक्टूबर (भाषा) पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के एक ‘बुक स्टॉल’ में अज्ञात लोगों ने कथित तौर पर तोड़फोड़ की और आग लगा दी। पार्टी सूत्रों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।
सूत्रों के अनुसार, यह घटना बृहस्पतिवार की रात हुई। यह ‘बुक स्टॉल’ (पुस्तकों की अस्थायी दुकान) बीजपुर के पलाशी माझीपाड़ा इलाके में चारापूल चौराहे पर लगाया गया था।
पार्टी ने बताया कि आग से अधिक नुकसान होने से पहले ही स्थानीय लोगों ने उसे बुझा दिया।
माकपा के वरिष्ठ सदस्य कलतान दासगुप्ता सहित पार्टी के स्थानीय नेताओं ने आरोप लगाया कि हमले के पीछे भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) समर्थित उपद्रवियों का हाथ है।
हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।
पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि स्थिति सामान्य है और घटनास्थल पर पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है।
इस बीच, कोलकाता के एंटाली इलाके में कमारडांगा दुर्गा पूजा समिति ने ‘बाम बध’ (वामपंथियों का वध करो) के नारे वाला एक बैनर लगाया और पूजा पंडाल के पास माकपा को ‘बुक स्टॉल’ लगाने से रोक दिया।
समिति ने वामपंथियों पर राष्ट्रविरोधी ताकतों की मदद करने का आरोप लगाया और दावा किया कि स्थानीय लोग भी वहां ‘स्टॉल’ लगाए जाने के विरोध में हैं।
नोआपाड़ा विधानसभा क्षेत्र के पालता शांतिनगर के अलावा कोलकाता के कुछ हिस्सों, जोड़ाबागान, शिबपुर और कुलपी में भी ‘बुक स्टॉल’ में तोड़फोड़ करने और उन्हें लगाए जाने से रोकने की ऐसी ही घटनाएं सामने आई हैं।
ये घटनाएं दुर्गा पूजा के दौरान वामपंथी दलों द्वारा ‘बुक स्टॉल’ लगाए जाने को लेकर जारी राजनीतिक बहस के बीच हुई हैं। पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा के दौरान स्टॉल लगाने की पुरानी परंपरा रही है और यह राज्य की सांस्कृतिक एवं राजनीतिक गतिविधियों का हिस्सा है।
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने इससे पहले दुर्गा पूजा समितियों से आग्रह किया था कि अगर माकपा दुर्गा पूजा के लिए ‘शारदोत्सव’ शब्द का इस्तेमाल करती है तो उसे स्टॉल लगाने के लिए जगह न दी जाए।
माकपा का कहना है कि ये स्टॉल पश्चिम बंगाल की उस परंपरा का अभिन्न हिस्सा हैं, जिसमें सांस्कृतिक उत्सवों के दौरान राजनीतिक विचारों और साहित्य का भी आदान-प्रदान होता है।
भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं पश्चिम बंगाल के मंत्री अर्जुन सिंह ने कहा कि भविष्य में ‘‘दिमागी नक्सलियों’’ को स्टॉल लगाने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
उन्होंने शुक्रवार को पत्रकारों से कहा, ‘‘ये लोग अपने माता-पिता की मृत्यु के बाद श्राद्ध कर्म भी नहीं करते। समाज में ऐसे लोगों के लिए कोई जगह नहीं है।’’
भाषा सिम्मी संतोष
संतोष