नयी दिल्ली, 16 अक्टूबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में कथित अनियमितताओं को लेकर शिवसेना (उबाठा) के नेता संजय राउत और कांग्रेस नेता राहुल गांधी समेत 13 लोगों की याचिका पर निर्वाचन आयोग और उसके प्रमुख ज्ञानेश कुमार को नोटिस जारी किया। न्यायालय ने साथ ही कहा कि राउत को अपने आचरण के बारे में स्पष्टीकरण देना होगा।
राउत, गांधी की ओर से दायर याचिका में शामिल 13 याचिकाकर्ताओं में से एक हैं।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने बृहस्पतिवार को स्पष्ट किया कि वह राउत की ओर से दायर याचिका पर फिलहाल अस्थायी रूप से विचार कर रही है और यह शर्त है कि उन्हें उनके आचरण के बारे में स्पष्टीकरण देना होगा।
पीठ ने अपने आदेश में कहा, ‘‘रिट याचिका (सिविल) संख्या 1351/2026 (मद संख्या 25, गांधी द्वारा दायर) में याचिकाकर्ता संख्या छह (राउत) की ओर से दायर याचिका पर फिलहाल अस्थायी रूप से विचार किया जा रहा है। लेकिन इस शर्त के साथ कि उन्हें उनके आचरण के बारे में स्पष्टीकरण देना होगा।’’
सुनवाई के दौरान प्रधान न्यायाधीश ने किसी का नाम लिए बिना कहा, ‘‘हम अगली सुनवाई पर याचिकाकर्ताओं में से एक से उसके आचरण के बारे में पूछेंगे।’’
प्रधान न्यायाधीश ने उस समय कड़ी टिप्पणी भी की, जब कुछ वकीलों ने आरोप लगाया कि गांधी और अन्य विपक्षी नेता न्यायपालिका पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं। इन नेताओं ने 12 अक्टूबर को उच्चतम न्यायालय तक मार्च किया था।
प्रधान न्यायाधीश ने कहा था, ‘‘कोई भी हम पर (न्यायपालिका पर) दबाव नहीं बना सकता। हम जमीन हकीकत से दूर नहीं हैं। हमें पता है कि वे बाहर क्या बयान दे रहे हैं और अदालत में क्या कह रहे हैं। हमें सब पता है।’’
राउत ने पिछले दिनों निर्वाचन आयोग से जुड़े मुद्दे पर गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से मुलाकात करने से इनकार करने के लिए प्रधान न्यायाधीश की कथित तौर पर आलोचना की थी।
शीर्ष अदालत ने निर्वाचन आयोग, मुख्य निर्वाचन आयुक्त और निर्वाचन आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू तथा विवेक जोशी को गांधी और 12 अन्य विपक्षी नेताओं की याचिका पर जवाब देने का निर्देश दिया।
याचिका में मांग की गई है कि उच्चतम न्यायालय के किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक स्वतंत्र समिति गठित की जाए, जिसमें तकनीकी विशेषज्ञों और अन्य प्रतिष्ठित नागरिकों को शामिल किया जाए।
समिति को मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान हटाए गए नामों और संशोधनों का एक निर्धारित समयसीमा के भीतर स्वतंत्र ऑडिट करने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है।
भाषा शोभना वैभव
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