कोच्चि, 15 अक्टूबर (भाषा) केरल उच्च न्यायालय ने बृहस्पतिवार को कहा कि लग्जरी कार हादसे को टाला जा सकता था, अगर कोई ऐसी तकनीक होती जो आरोपी द्वारा पहले भी तेज गति से गाड़ी चलाने की घटनाओं के बारे में पुलिस को सूचित कर पाती। अदालत ने भविष्य में ऐसी दुर्घटनाओं को रोकने के लिए एक 'मंच' बनाने का सुझाव दिया।
इस हादसे में तीन लोगों की मौत हो गई थी।
न्यायमूर्ति राजा विजयराघवन वी. और न्यायमूर्ति के. वी. जयकुमार की पीठ ने कहा कि राज्यभर में लगाए गए 'स्वचालित नंबर प्लेट पहचान प्रणाली' से लैस कृत्रिम बुद्धिमत्ता(एआई) कैमरों को तेज रफ्तार से चलने वाले वाहनों का पता लगने पर पुलिस को इसकी सूचना देने में सक्षम होना चाहिए।
अदालत ने 'केरल राज्य इलेक्ट्रॉनिक्स विकास निगम लिमिटेड' (केल्ट्रॉन) से पूछा कि पिछले दो महीनों में एआई कैमरों ने तेज रफ्तार से चलने वाले कितने वाहनों का पता लगाया और इनमें से कितने मामलों की जानकारी संबंधित अधिकारियों को दी गई। अदालत ने यह भी पूछा कि इन मामलों में कोई कार्रवाई की गई या नहीं।
पीठ ने कहा, ‘‘हादसे में शामिल युवक इससे पहले 210 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक की रफ्तार से गाड़ी चला रहा था। अगर आपके कैमरे ने इसका पता लगाकर अधिकारियों को सूचना दी होती, तो यह हादसा नहीं होता। हर चीज के लिए तकनीक उपलब्ध है, लेकिन आप (राज्य सरकार) उसका इस्तेमाल नहीं कर पा रहे हैं।’’
भाषा प्रचेता प्रशांत
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