चंडीगढ़, 15 अक्टूबर (भाषा) पंजाब के मानसा में नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले सामाजिक कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की एक मेडिकल स्टोर के मालिक द्वारा हत्या के दो दिन बाद बृहस्पतिवार को स्थानीय थाना प्रभारी को निलंबित कर दिया गया और आरोपी की पत्नी को गिरफ्तार कर लिया गया।
सिटी-2 की थाना प्रभारी बेअंत कौर को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया।
अदालत ने कथित तौर पर गोली चलाने वाले अश्विनी कुमार और उसके सहयोगी विपिन कुमार को सात दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया। दोनों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए मानसा की अदालत में पेश किया गया।
पुलिस ने अश्विनी की पत्नी नीलम रानी और उसकी सहयोगी लाडी को गिरफ्तार किया है।
मानसा के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) वैभव चौधरी ने पत्रकारों को बताया कि झोटा की गोली मारकर हत्या करने के बाद कुमार ने अपना फोन बंद कर दिया और लाडी तथा विपिन की मदद से फरार हो गया। उसे राजस्थान के सालासर से पकड़ा गया।
झोटा की हत्या से पहले कुमार ने फोन पर किससे बात की थी, इस बारे में पूछे जाने पर एसएसपी ने कहा कि उसने अपने चाचा को एक बार और बेटे को चार बार फोन किया था। उन्होंने कहा, ‘‘हम मामले की आगे जांच कर रहे हैं।’’
एसएसपी ने बताया कि पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि कुमार, जिस पर कम से कम पांच प्राथमिकी दर्ज थीं, उसे हथियारों का लाइसेंस कैसे मिल गया।
उन्होंने पत्रकारों से कहा, ‘‘उसका मादक पदार्थ नेटवर्क क्या था? उसे हथियार कहां से मिले और उसका हथियारों का लाइसेंस कैसे मंजूर हुआ, इन सभी बातों की जांच की जाएगी।’’
बंदूक अब तक बरामद नहीं हुई है।
इससे पूर्व एसएसपी वैभव चौधरी ने थाना प्रभारी बेअंत कौर के निलंबन का आदेश जारी किया। झोटा के परिजन बेअंत कौर समेत कुछ पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे थे। परिवार का कहना है कि वे झोटा का अंतिम संस्कार तब तक नहीं करेंगे, जब तक उन्हें न्याय नहीं मिल जाता।
चौधरी ने बताया कि प्रारंभिक जांच से पता चला है कि जिस मेडिकल स्टोर पर झोटा को गोली मारी गई थी, उसका ‘फार्मेसी लाइसेंस’ आरोपी अश्विनी कुमार की पत्नी नीलम रानी के नाम पर था।
पुलिस ने कुमार के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धाराओं 103 (1) (हत्या), 109 (हत्या का प्रयास), 118 (1) (खतरनाक हथियार या साधन से जानबूझकर चोट पहुंचाना), 61 (2) (आपराधिक साजिश) और 3(5) (साझा मंशा) तथा शस्त्र अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है।
यह मामला झोटा के पिता भीम सिंह की शिकायत पर सिटी-2 पुलिस थाने में दर्ज किया गया है। सिंह एक पूर्व सैनिक हैं।
झोटा नशे के खिलाफ आवाज उठाने और दवा की दुकानों पर नशीले पदार्थों की अवैध बिक्री का विरोध करते थे। उनकी मंगलवार को मानसा बाजार में एक मेडिकल स्टोर के अंदर दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।
झोटा ने एक बुजुर्ग व्यक्ति को नशीली दवाएं बेचने को लेकर मेडिकल स्टोर के मालिक अश्विनी कुमार से सवाल किया था जिसके बाद उसने झोटा पर गोली चला दी।
यह घटना उस समय हुई, जब झोटा अपनी बातचीत का फेसबुक पर सीधा प्रसारण कर रहे थे।
झोटा की हत्या के बाद पंजाब में राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया। राज्य में अगले साल की शुरुआत में विधानसभा चुनाव होने हैं।
एक नए घटनाक्रम में सोशल मीडिया पर हथियार के लाइसेंस की एक प्रति सामने आई है। इसमें कथित तौर पर दिख रहा है कि कुमार के नाम पर दो लाइसेंसी हथियार दर्ज थे - एक 7.62 एमएम की पिस्तौल और एक .12 बोर की बंदूक।
झोटा का शव मानसा के सिविल अस्पताल के शवगृह में रखा है।
झोटा की हत्या के बाद विभिन्न संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने एक संयुक्त कार्य समिति बनाई है। समिति ने मुख्यमंत्री भगवंत मान और पुलिस महानिदेशक गौरव यादव के इस्तीफे तथा कई स्थानीय अधिकारियों और औषधि निरीक्षक को बर्खास्त करने की मांग की है।
समिति ने मामले की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से जांच कराने की भी मांग की है।
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने हत्या में शामिल लोगों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाने का संकल्प जताया। वहीं, विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि राज्य में ‘‘जंगलराज’’ है और कानून-व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है।
अपनी शिकायत में भीम सिंह ने कहा कि उनका इकलौता बेटा मुक्केबाज और क्रिकेट खिलाड़ी था तथा उसने अपना जीवन नशे के खिलाफ लड़ाई में समर्पित कर दिया था।
सिंह ने आरोप लगाया कि नशे के खिलाफ उसके अभियान के कारण मानसा में नशीले पदार्थों की तस्करी करने वाले लोग और इस कारोबार में कथित रूप से शामिल नेता तथा सरकारी अधिकारी उससे नाराज हो गए थे।
सिंह की ओर से पंजाब बंद के आह्वान के मद्देनजर बृहस्पतिवार को राज्य की सड़कों और बाजारों में सन्नाटा पसरा रहा। कई जिलों में दुकानें और निजी स्कूल बंद रहे।
बंद के समर्थन में प्रदर्शनकारियों ने कई सड़कों पर जाम भी लगाया।
पंजाब बंद के आह्वान को कांग्रेस, अकाली दल, भाजपा, अकाली दल वारिस पंजाब दे, संयुक्त किसान मोर्चा और राज्य सरकार के कर्मचारी संगठनों ने समर्थन दिया।
भाषा सुरभि प्रशांत
प्रशांत