कोलकाता, 15 अक्टूबर (भाषा) कलकत्ता उच्च न्यायालय ने बृहस्पतिवार को कहा कि उसे पश्चिम बंगाल की भाजपा सरकार से राज्य में अलग-अलग राजनीतिक विचारों को जगह देने वाला माहौल बनाने की अपेक्षा है। इसी के साथ अदालत ने मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) को बोंगांव में दुर्गा पूजा पंडाल के पास बुकस्टॉल लगाने की अनुमति दे दी।
अदालत ने कहा कि लोकतंत्र में विभिन्न राजनीतिक विचारों और विचारधाराओं का प्रसार स्वागत योग्य है। इससे लोकतंत्र ‘फलदायी, मजबूत जड़ों वाला और परिपक्व’ बनता है।
न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य ने कहा, ‘‘मौजूदा सरकार से यह अपेक्षा की जाती है कि वह ऐसा माहौल बनाए, जिसमें अलग-अलग राजनीतिक विचारधाराओं से जुड़े लोग अपनी राय व्यक्त करने में संकोच न करें।’’
अदालत ने बोंगांव पुलिस जिले के पुलिस अधीक्षक और बोंगांव थाने के प्रभारी निरीक्षक को सार्वजनिक व्यवस्था और शांति बनाए रखने का निर्देश दिया, ताकि याचिकाकर्ता माकपा दुर्गा पूजा के दिनों में संबंधित स्थल पर अपने पार्टी कार्यालय के 100 मीटर के दायरे में बुकस्टॉल लगा सके और अपनी किताबें बेच सके।
पार्टी कार्यालय दुर्गा पूजा पंडाल के पास स्थित है। माकपा दशकों से दुर्गा पूजा पंडालों के पास बुकस्टॉल लगाती रही है।
न्यायमूर्ति भट्टाचार्य ने पुलिस अधिकारियों को पर्याप्त संख्या में सुरक्षाकर्मी तैनात करने का निर्देश दिया, ताकि वामपंथी पार्टी के सदस्य बुकस्टॉल स्थापित कर सकें और किताबें बेच सकें।
अदालत ने पुलिस अधीक्षक को निर्देश दिया कि वह 23 नवंबर को अगली सुनवाई के दौरान आदेश का पालन करने के लिए उठाए गए कदमों पर रिपोर्ट दाखिल करें।
इससे पहले दिन में मुख्य न्यायाधीश रवींद्र वी. घुगे की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने माकपा की याचिका पर न्यायमूर्ति भट्टाचार्य द्वारा 14 अक्टूबर को दिए गए आदेश के खिलाफ बोंगांव थाने के प्रभारी की अपील का निपटारा कर दिया।
खंडपीठ ने एकल न्यायाधीश को यह विचार करने की अनुमति दी कि क्या इस मामले की सुनवाई करना उनके अधिकार क्षेत्र में आता है। अपीलकर्ता ने अपनी याचिका में इस पर भी सवाल उठाया था।
याचिकाकर्ता के वकील ने दावा किया था कि दुर्गा पूजा पंडाल के पास उस जगह हिंदू जागरण मंच का एक स्टॉल लगाया गया है, जहां माकपा पिछले 50 वर्षों से अपना अस्थायी बुकस्टॉल लगाती रही है।
न्यायमूर्ति भट्टाचार्य ने बोंगांव थाने के प्रभारी निरीक्षक को जांच करने और बृहस्पतिवार को रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया था।
रिपोर्ट में यह बताना था कि क्या अन्य लोगों ने लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) या अन्य संबंधित अधिकारियों की अनुमति के बिना जेसोर रोड पर स्टॉल लगाए हैं।
भाषा संतोष अविनाश
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