रायपुर, 15 अक्टूबर (भाषा) छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में माओवादी विस्फोट की घटना में अपना पैर गंवा चुकी 20 वर्षीय मड़कम सुक्की के चेहरे पर खुशी की चमक है, क्योंकि अब वह कृत्रिम पैर के सहारे फिर से चल सकेगी।
सुक्की को बृहस्पतिवार को दंतेवाड़ा जिला प्रशासन द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में कृत्रिम पैर (प्रोस्थेटिक लिम्ब) दिया गया।
सुकमा के भीमपुरम गांव की रहने वाली सुक्की 26 मई 2024 की सुबह अपनी एक सहेली के साथ महुआ इकट्ठा करने जंगल गई थी, तभी उसका पैर माओवादियों द्वारा जमीन के नीचे लगाए गए एक बारूदी सुरंग पर पड़ गया।
इस घटना में सुक्की के बाएं पैर में गंभीर चोटें आईं, जिसके बाद रायपुर के एक अस्पताल में उसका पैर काटना पड़ा।
एक अधिकारी ने बृहस्पतिवार को बताया कि दंतेवाड़ा जिला मुख्यालय में आयोजित एक शिविर में बारूदी सुरंग विस्फोट के लगभग 30 पीड़ितों को कृत्रिम अंग और अन्य सहायक उपकरण दिए गए, जिनमें सुक्की भी शामिल है।
इन उपकरणों में कृत्रिम पैर, कैलीपर्स, सुनने की मशीनें और ट्राइसाइकिल शामिल है।
'सेवा संकल्प अभियान' के तहत 15 से 17 अक्टूबर तक आयोजित इस तीन दिवसीय मुफ्त शिविर को जिला प्रशासन के सहयोग से 'भगवान महावीर विकलांग सहायता समिति, जयपुर' और 'एनएसई फाउंडेशन' द्वारा प्रायोजित किया गया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इस कार्यक्रम को ऑनलाइन संबोधित किया।
सुक्की ने ‘पीटीआई-भाषा’ से फोन पर बात करते हुए बताया कि पैर गंवाने के बाद वह पूरी तरह टूट गई थी। उसने बहुत पहले अपनी मां को और कुछ साल पहले अपने पिता को भी खो दिया था।
उसने कहा, 'पैर गंवाने के बाद मेरी जिंदगी बदल गई। मैं न तो अपने दोस्तों के साथ खेल पाती थी और न ही ठीक से कोई काम कर पाती थी।'
उसने बताया कि वह अपने चाचा के साथ रहती है और उसका छोटा भाई उसकी देखभाल करता है।
सुक्की ने बताया कि वह कभी स्कूल नहीं गई और स्थानीय बोली बोलती है।
उसने कृत्रिम पैर उपलब्ध कराने के लिए जिला प्रशासन को धन्यवाद दिया।
सुकमा जिले में 2013 में एक अभियान के दौरान प्रेशर बम विस्फोट में अपना बायां पैर गंवाने वाले पुलिस आरक्षक मड़कम मुन्ना (34) को भी इस शिविर में एक नया कृत्रिम अंग मिला।
मुन्ना ने बताया कि वह 2010 में एक विशेष पुलिस अधिकारी (एसपीओ) के तौर पर पुलिस बल में शामिल हुए था और बाद में उसे सहायक आरक्षक के पद पर पदोन्नत किया गया।
उन्होंने 2013 में गश्त के दौरान हुए एक धमाके में अपना बायां पैर खो दिया था, जिसके बाद उन्हें रायपुर में एक कृत्रिम अंग मिला था।
सुकमा के दोरनापाल गांव के रहने वाले मुन्ना अभी दोरनापाल पुलिस थाना में तैनात हैं, जहां वह कार्यालय का काम संभालते हैं।
उन्होंने बताया कि उनकी पत्नी, जिन्होंने इस घटना के बाद उनका पूरा साथ दिया था, उनका इस साल की शुरुआत में किडनी से जुड़ी बीमारी के कारण निधन हो गया। अब वह अपनी मां और बहन के साथ रहते हैं।
इस कार्यक्रम में डिजिटल माध्यम से शामिल होते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि माओवादी हिंसा में कई निर्दोष लोगों ने अपने अंग खो दिए हैं। उन्होंने कहा कि ये सहायक उपकरण उनके रोजमर्रा के जीवन को आसान बनाएंगे और उन्हें आत्मनिर्भर बनने में मदद करेंगे।
उन्होंने बताया कि राज्य सरकार, जयपुर की एक संस्था के साथ मिलकर बारूदी सुरंग विस्फोट से प्रभावित लोगों को कृत्रिम अंग, कैलीपर्स, ट्राईसाइकिल, व्हीलचेयर, सुनने की मशीनें और अन्य उपकरण उपलब्ध करा रही है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में, राज्य माओवादी हिंसा को खत्म करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, जिसका लक्ष्य 31 मार्च 2026 तक इसे पूरी तरह समाप्त करना है।
उन्होंने सुरक्षाकर्मियों के साहस को नमन किया और माओवाद के खिलाफ लड़ाई में बस्तर के निवासियों के सहयोग की सराहना की।
दंतेवाड़ा जिले के कलेक्टर देवेश कुमार ध्रुव ने बताया कि मदद के लिए लगभग एक हजार लोगों की पहचान की गई थी, जिनमें से 768 लोगों ने (जिनमें माओवादी हिंसा से प्रभावित लोग भी शामिल हैं) इस शिविर के लिए रजिस्ट्रेशन कराया था।
उन्होंने बताया कि जिला प्रशासन के अनुसार, इनमें दंतेवाड़ा से 509, बीजापुर से 197 और सुकमा से 62 लाभार्थी शामिल हैं।
भाषा संजीव सुरभि
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