नयी दिल्ली, 15 अक्टूबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने बृहस्पतिवार को केंद्रीय गृह मंत्रालय से केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) के कैडर समीक्षा प्रस्तावों से जुड़ी मूल फाइलें पेश करने को कहा, ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या ये प्रस्ताव शीर्ष अदालत द्वारा 2025 में तय की गई छह महीने की अधिकतम समयसीमा के बाद भेजे गए थे या नहीं।
न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा और न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुइयां की पीठ ने कहा कि नए सीएपीएफ अधिनियम के लागू होने का पांच केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के कैडर की समीक्षा पर कोई असर नहीं पड़ता।
पीठ ने कहा कि गृह मंत्रालय अदालत के आदेश के बाद की गई कार्रवाई का ब्योरा देने वाली फाइलें पेश करे जिसमें कैडर समीक्षा से जुड़े प्रस्ताव पर की गई कार्रवाई का विवरण भी शामिल हो।
न्यायमूर्ति मिश्रा ने केंद्र की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी से कहा कि मंत्रालय को सभी फाइलें पेश करनी चाहिए।
भाटी ने पीठ को आश्वासन दिया कि छिपाने के लिए कुछ भी नहीं है और सरकार ने मई 2025 में जारी अदालत के निर्देशों का पालन करने के लिए सद्भावनापूर्वक कदम उठाए हैं। उन्होंने कहा कि अगली सुनवाई पर फाइलें पेश कर दी जाएंगी।
शीर्ष अदालत ने अदालत के निर्देशों का पालन नहीं किए जाने को लेकर सीएपीएफ के अधिकारियों की ओर से दायर अवमानना याचिका और कैडर समीक्षा के लिए समय बढ़ाने के केंद्र के आवेदन सहित इस मामले पर अगली सुनवाई के लिए 27 अक्टूबर की तारीख तय की है।
भाषा संतोष सुरेश
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