मुंबई, 15 अक्टूबर (भाषा) टाटा ट्रस्ट के तहत संचालित होने वाले दो ट्रस्ट ने बृहस्पतिवार को महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर के कार्यालय में हलफनामा दाखिल कर अपने कामकाज पर सवाल उठाने के मेहली मिस्त्री के अधिकार को चुनौती दी।
सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट और बाई हीराबाई जमशेदजी टाटा नवसारी चैरिटेबल इंस्टिट्यूशन ने कहा कि दिवंगत रतन टाटा के करीबी माने जाने वाले मिस्त्री का ट्रस्टी के रूप में कार्यकाल 28 अक्टूबर, 2025 को समाप्त हो गया था। ऐसी स्थिति में उन्हें न्यासों के संचालन और प्रशासन पर सवाल उठाने का अधिकार नहीं है।
मिस्त्री ने कथित तौर पर दोनों ट्रस्ट में प्रशासन संबंधी खामियों और हितों के टकराव का आरोप लगाते हुए चैरिटी कमिश्नर के समक्ष शिकायत की थी।
दोनों ट्रस्ट ने अलग-अलग हलफनामों में कहा कि मिस्त्री की नियुक्ति तीन साल के लिए थी और वह पूर्व ट्रस्टी होने के आधार पर उनके कामकाज को चुनौती नहीं दे सकते। उन्होंने आग्रह किया कि शिकायतों के गुण-दोष पर विचार करने या किसी जांच का आदेश देने से पहले उनकी आपत्तियों पर फैसला किया जाए।
सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट (एसडीटीटी) ने कहा कि वह, सर रतन टाटा ट्रस्ट और बाई हीराबाई अलग-अलग सार्वजनिक धर्मार्थ ट्रस्ट हैं। इनके संचालन संबंधी दस्तावेज, न्यासी मंडल, संपत्तियां और खाते भी अलग हैं। इसलिए इन सभी मामलों की एक साथ सुनवाई नहीं होनी चाहिए।
इन हलफनामों पर जवाब दाखिल करने के लिए मिस्त्री को पांच नवंबर तक का समय दिया गया है।
इस बीच, बाई हीराबाई ट्रस्ट ने विजय सिंह के इस साल ट्रस्टी पद से हटने के बाद उनकी जगह नोएल टाटा को मामले में रिपोर्टिंग ट्रस्टी नियुक्त करने के लिए आवेदन दिया है।
मिस्त्री ने इस पर आपत्ति जताते हुए कहा है कि चैरिटी कमिश्नर के कार्यालय को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि नोएल टाटा ट्रस्ट के नियमों के तहत ट्रस्टी बनने की पात्रता रखते हैं।
एक अन्य सुनवाई में सर रतन टाटा ट्रस्ट ने चैरिटी कमिश्नर के कार्यालय से कहा कि 15 मई के आदेश के कारण उसे बैठकें आयोजित करने पर रोक का सामना करना पड़ रहा है।
भाषा प्रेम प्रेम अजय
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