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बिना सब्सिडी वाले उर्वरक की बिक्री पर प्रतिबंध को लेकर पुनर्विचार करे बिहार सरकार : एफएआई

नयी दिल्ली, 14 अक्टूबर (भाषा) फर्टिलाइजर एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एफएआई) ने बिहार सरकार से बिना सब्सिडी वाले मृदा पोषक तत्वों की बिक्री पर लगाए गए प्रतिबंध पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया है। संगठन ने कहा कि वह ऐसे उत्पादों को सब्सिडी वाले उर्वरकों के साथ जोड़ने करने का समर्थन नहीं करती है।

राज्य सरकार ने आठ अक्टूबर को बिना सब्सिडी वाले उर्वरकों की बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया था। किसानों ने शिकायत की थी कि इन उत्पादों को सब्सिडी वाले यूरिया, डीएपी और मिश्रित उर्वरकों के साथ लेने के लिए बाध्य किया जा रहा है, जिससे उनकी कृषि लागत बढ़ रही है।

राज्य सरकार को लिखे पत्र में एफएआई ने प्रतिबंध की समीक्षा करने की मांग करते हुए कहा कि इससे किसानों को मृदा स्वास्थ्य और फसल उत्पादकता के लिए जरूरी पोषक तत्वों की उपलब्धता पर प्रतिकूल असर पड़ेगा।

पत्र में कहा गया, ‘‘एफएआई लगातार अन्य उत्पादों के साथ गैर-सब्सिडी वाले उर्वरकों को जोड़ने का विरोध करता रहा है।’’

उद्योग संगठन ने कहा कि उसने कई भाषाओं में राष्ट्रीय समाचार पत्रों में विज्ञापन देकर भी अपना रुख स्पष्ट किया है।

संगठन ने कहा कि यह प्रतिबंध मृदा स्वास्थ्य की रक्षा और टिकाऊ उत्पादकता सुनिश्चित करने के लिए उर्वरकों के संतुलित इस्तेमाल को बढ़ावा देने की सरकार की पहल के विपरीत है।

उसने कहा कि एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन, जिसमें खनिज उर्वरकों, जैव उर्वरकों और जैविक खाद का उचित अनुपात में इस्तेमाल किया जाता है, मृदा स्वास्थ्य और दीर्घकालिक उत्पादकता बनाए रखने का एकमात्र वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित तरीका है।

एफएआई ने कहा कि जैव उर्वरकों में भारत की आयातित खनिज उर्वरकों पर निर्भरता कम करने की काफी संभावनाएं हैं, जिनका अबतक पूरी तरह इस्तेमाल नहीं किया गया है।

संगठन के अनुसार, किसान अक्सर सब्सिडी वाले उर्वरकों के पूरक के रूप में बिना सब्सिडी वाले उत्पादों का इस्तेमाल करते हैं, ताकि फसलों को पोषक तत्वों का उचित मिश्रण मिल सके। बढ़ती आबादी की जरूरतों को पूरा करने के लिए खाद्यान्न उत्पादन बढ़ाने के लिहाज से इन उत्पादों की उपलब्धता महत्वपूर्ण है।

मिट्टी से जुड़े आंकड़ों का हवाला देते हुए एफएआई ने कहा कि बिहार की मिट्टी में जैविक कार्बन का स्तर काफी कम है, जबकि मृदा स्वास्थ्य बनाए रखने के लिए यह 0.75 प्रतिशत से अधिक होना चाहिए। संगठन ने इसके उपायों में गोबर की खाद, कंपोस्ट और फसल अवशेषों का इस्तेमाल करने के साथ-साथ यूरिया के अत्यधिक उपयोग से बचने और जैविक एवं अकार्बनिक स्रोतों को मिलाकर उर्वरकों के संतुलित इस्तेमाल का सुझाव दिया।

एफएआई ने कहा, ‘‘इन उत्पादों पर प्रतिबंध से पोषक तत्वों का संतुलन बिगड़ सकता है, जिससे पैदावार घट सकती है और मिट्टी का स्वास्थ्य खराब हो सकता है।’’

उसने चेतावनी दी कि खाद्य सुरक्षा को बढ़ावा देने के बजाय यह कदम कृषि उत्पादन और किसानों की आय को नुकसान पहुंचा सकता है।

भाषा राजेश राजेश अजय

अजय