उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा स्थित शारदा विश्वविद्यालय में बुधवार को युवा महोत्सव ‘सनातनी शंखनाद 2026’ का भव्य आयोजन हुआ। उत्तर प्रदेश सूचना विभाग की ओर से आयोजित इस महोत्सव में प्रदेशभर से आए आठ हजार से अधिक युवाओं ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम में सनातन संस्कृति, भारतीय परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण पर चर्चा हुई। युवाओं ने ‘भाषा अनेक, भाव एक’ का संदेश देते हुए भारत की विविधता में एकता की भावना को सामने रखा।
महोत्सव का मुख्य उद्देश्य नई पीढ़ी को देश की सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ना और विरासत के संरक्षण में युवाओं की भागीदारी बढ़ाना रहा। ‘विविध भारत: उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ाव’ थीम पर आधारित इस आयोजन में वैचारिक संवाद के साथ सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने भी दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया।
सनातन संस्कृति और राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका पर चर्चा

महोत्सव के वैचारिक सत्रों में सनातन परंपरा के वैज्ञानिक और तार्किक पक्ष, भारतीय संविधान में धार्मिक स्वतंत्रता, आध्यात्मिक ज्ञान और राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका जैसे विषयों पर चर्चा हुई। कार्यक्रम में संत बालकानंद गिरि जी महाराज, सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता विष्णु जैन, साध्वी डॉ. शिवानी भारती और काजल हिंदुस्तानी ने युवाओं से संवाद किया।
वक्ताओं ने सनातन संस्कृति, भारतीय सांस्कृतिक पहचान और युवा शक्ति के महत्व पर अपने विचार रखे। साथ ही, वर्ष 2017 के बाद उत्तर प्रदेश में सांस्कृतिक गतिविधियों, धार्मिक पर्यटन और विरासत संरक्षण के क्षेत्र में हुए बदलावों पर भी चर्चा की गई। युवाओं को अपनी सांस्कृतिक परंपराओं को समझने और उन्हें आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित किया गया।
लोकनृत्य और भक्ति संगीत ने बांधा समां

महोत्सव के सांस्कृतिक मंच पर भारतीय परंपराओं की विविधता देखने को मिली। लोकनृत्य, कथक, भरतनाट्यम, भक्ति संगीत और नाट्य मंचन जैसी प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। मां दुर्गा के शक्ति स्वरूप को समर्पित विशेष नृत्य प्रस्तुति भी आकर्षण का केंद्र रही।
इसके बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में हुए सांस्कृतिक बदलावों पर आधारित विशेष गीत और दृश्य प्रस्तुति पेश की गई, जिसे दर्शकों की सराहना मिली।
संगीत और भक्ति के संगम के साथ हुआ समापन

युवा महोत्सव का समापन केशवम बैंड की ग्रैंड म्यूजिकल नाइट के साथ हुआ। इस दौरान आधुनिक संगीत और भजनों के संगम ने कार्यक्रम में मौजूद युवाओं में उत्साह भर दिया। पूरे आयोजन में भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिकता और युवा ऊर्जा का मेल देखने को मिला।
‘सनातनी शंखनाद 2026’ के माध्यम से युवाओं को भारतीय सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने, विविध परंपराओं के प्रति सम्मान बढ़ाने और संरक्षण के प्रयासों में उनकी सक्रिय भागीदारी को प्रोत्साहित करने का संदेश दिया गया। कार्यक्रम में ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ की भावना और सांस्कृतिक एकता पर विशेष जोर रहा।
