नयी दिल्ली, 14 अक्टूबर (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार को केंद्र सरकार से उस याचिका पर जवाब मांगा, जिसमें एक अक्टूबर से सब्सिडी वाले घरेलू रसोई गैस सिलेंडर बुक कराने के लिए ‘आधार’ के जरिये बायोमेट्रिक सत्यापन अनिवार्य किये जाने के फैसले को चुनौती दी गई है।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश नितिन वासुदेव सांब्रे और न्यायमूर्ति संजय शर्मा की पीठ ने जनहित याचिका पर केंद्र सरकार, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस नियामक बोर्ड तथा सरकारी तेल कंपनियों को नोटिस जारी किए।
यह याचिका वकील पुलकित लूथरा ने दायर की है। अदालत ने सभी प्रतिवादियों को जवाब दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया है।
याचिकाकर्ता, जो 75 प्रतिशत स्थायी दृष्टिबाधित है, ने दलील दी कि आधार के जरिये बायोमेट्रिक सत्यापन (बीएए) की अनिवार्य प्रक्रिया में आंखों की पुतली की पहचान के जरिए सत्यापन भी शामिल है। इससे उन्हें और उनके जैसे दृष्टिबाधित लोगों को काफी परेशानी होती है।
अटॉर्नी जनरल (एजी) आर. वेंकटरमणि ने कहा कि सरकार ने सरकारी सब्सिडी के “दुरुपयोग” को रोकने के लिए यह फैसला लिया है।
उन्होंने भरोसा दिलाया कि दिव्यांग लोगों का ध्यान रखा जाएगा।
वेंकटरमणि ने कहा, “इस संबंध में कोई आंकड़ा नहीं है। मैं समझ सकता हूं कि दिव्यांगजनों को कुछ विशेष सुविधाओं की जरूरत है। योजनाओं के तहत दी जाने वाली सब्सिडी का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग हो रहा था, जिसपर सरकार रोक लगाना चाहती है। दिव्यांग लोगों का ध्यान रखा जाएगा।”
याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता जोहेब हुसैन ने दलील दी कि सरकार का यह फैसला कानून और आधार के संबंध में उच्चतम न्यायालय के फैसले के खिलाफ है।
उन्होंने दलील दी कि पूर्व में दी गई एक व्यवस्था के तहत एक अक्टूबर से एलपीजी की आपूर्ति बंद कर दी गई है। उन्होंने अदालत से आग्रह किया कि अगली सुनवाई पर इस मामले में अंतरिम राहत देने पर विचार किया जाए।
अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 18 नवंबर की तारीख तय की है।
भाषा जोहेब सुभाष
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