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विदेश मंत्रालय रूस में मारे गए लोगों के परिजन से मुआवजे के लिए आवेदन मांगे : न्यायालय

नयी दिल्ली, 14 अक्टूबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को कहा कि मुआवजा मांगने के अधिकार को लागू किया जाना चाहिए। इसी के साथ शीर्ष अदालत ने विदेश मंत्रालय से एक सार्वजनिक नोटिस जारी करने पर विचार करने को कहा, जिसमें रूस-यूक्रेन युद्ध में लड़ते हुए मारे गए भारतीयों के परिजन से मदद और मुआवजे के वास्ते आवेदन आमंत्रित किए जाएं।

विदेश मंत्रालय ने प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची के समक्ष दाखिल ताजा वस्तुस्थिति रिपोर्ट में युद्ध में लड़ने वाले 51 भारतीयों की मौत हो चुकी है, जबकि 77 अन्य का अब तक पता नहीं चल पाया है।

पीठ ने विदेश मंत्रालय को एक नयी वस्तुस्थिति रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया, जिसमें उन छह परिवारों को रूस सरकार की ओर से दिए गए सटीक मुआवजे का विवरण शामिल हो, जिनके सदस्य वहां युद्ध क्षेत्र में मारे गए।

यह निर्देश केंद्र की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी के यह बताने के बाद दिया गया कि रूस सरकार ने अब तक मुआवजे से संबंधित छह दावों पर कार्रवाई की है।

भाटी ने बताया कि मुआवजे के पांच दावों का पूरी तरह और एक दावे का आंशिक रूप से निपटारा कर दिया गया है।

पीठ ने कहा कि वहां दुर्भाग्यवश जान गंवाने वाले सभी 51 भारतीयों के परिजन को मुआवजे की मांग करने का अधिकार है।

उसने राजस्थान, पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश के जिला विधिक सेवा प्राधिकरणों से कहा कि वे प्रभावित परिवारों को “दावे दाखिल करने और/या डीएनए जांच कराने के अलावा अन्य आवश्यक कानूनी एवं प्रशासनिक औपचारिकताएं पूरी करने” के लिए मुफ्त कानूनी मदद देने के उसके पहले के निर्देश का पालन करें।

भाटी ने पीठ को बताया कि लगभग 267 भारतीय रूसी सेना में शामिल हुए थे, जिनमें से 51 की मौत हो गई और 139 को सैन्य सेवा से मुक्त कर दिया गया।

उन्होंने बताया कि रूस स्थित भारतीय दूतावास उन 77 भारतीयों का पता लगाने की कोशिश कर रहा है, जो रूसी सेना में भर्ती हुए थे; इनमें वे सात लोग भी शामिल हैं, जिनके लापता होने की पुष्टि रूसी अधिकारियों ने की है।

पीठ ने विदेश मंत्रालय की इस दलील का संज्ञान लिया कि अधिकारी प्रभावित परिवारों से अलग-अलग संपर्क कर रहे हैं और उम्मीद जताई कि वे मुआवजे के लिए दावा दाखिल करने की प्रक्रिया में उनकी मदद करेंगे।

पीठ ने रूस से मुआवजा हासिल करने में आ रही कठिनाइयों, डीएनए जांच के आधार पर पहचान करने में हो रही देरी और मृतकों के पार्थिव अवशेषों को भारत लाने में आ रही दिक्कतों पर भी गौर किया।

भाटी ने पीठ से कहा कि पीड़ित परिवारों की मदद के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं।

उन्होंने कहा, “अंततः हमारे कूटनीतिक और वाणिज्य दूतावास संबंधी प्रयासों से मदद मिलेगी।”

‍भाटी ने कहा कि रूसी अधिकारी सहयोग कर रहे हैं और सरकार प्रक्रिया को सरल बनाने का अनुरोध आगे भी जारी रखेगी।

पीठ ने सिकंदर सिंह के मामले पर भी विचार किया, जिन्हें रूस में छेड़छाड़ के एक मामले में आठ साल की जेल की सजा सुनाई गई है।

पीठ से विदेश मंत्रालय को सिकंदर को बाकी सजा काटने के लिए भारत की किसी जेल में स्थानांतरित कराने की संभावनाओं पर विचार करने का निर्देश देने का आग्रह किया गया।

भाटी ने कहा कि इसके लिए सिकंदर को रूस की अपीलीय अदालत में सजा के खिलाफ दाखिल अपील वापस लेनी होगी।

याचिकाकर्ताओं ने उन एजेंट के खिलाफ कार्रवाई का भी अनुरोध किया है, जिन पर भारतीयों को नौकरी का झांसा देकर उन्हें रूसी सेना में भर्ती करने का आरोप है।

भाटी ने शीर्ष अदालत को बताया कि 31 जुलाई के उसके निर्देश के तहत एक नोडल अधिकारी नियुक्त कर दिया गया था।

न्यायालय ने 31 जुलाई को केंद्र सरकार को निर्देश दिया था कि वह विदेश मंत्रालय में एक नोडल अधिकारी नियुक्त करे, जो रूस-यूक्रेन युद्ध में लड़ते हुए मारे गए, लापता हुए या घायल हुए लोगों के परिवारों के साथ समन्वय का काम करेगा।

उसने मंत्रालय को यह भी निर्देश दिया था कि वह परिवार के सदस्यों और शव के अवशेषों के डीएनए मिलान की प्रक्रिया में मदद करे।

भाषा पारुल पवनेश

पवनेश