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विदेशी मुद्रा बाजार में स्थिरता और सट्टेबाजी पर अंकुश के लिए उठाए गए कदम: आरबीआई गवर्नर

नयी दिल्ली, 14 अक्टूबर (भाषा) भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा है कि पेट्रोलियम विपणन कंपनियों के लिए विशेष डॉलर सुविधा शुरू करने जैसे हाल के कदमों का उद्देश्य विदेशी मुद्रा बाजार में व्यवस्थित कारोबार सुनिश्चित करना और अनुचित सट्टेबाजी पर अंकुश लगाना है।

मल्होत्रा ने 'मनीकंट्रोल' को दिए साक्षात्कार में कहा कि केंद्रीय बैंक रुपये के लिए किसी विशेष विनिमय दर या दायरे को लक्ष्य नहीं बनाता है। उसका ध्यान रुपये में व्यवस्थित उतार-चढ़ाव सुनिश्चित करने और अत्यधिक सट्टेबाजी को रोकने पर है।

पिछले सप्ताह आरबीआई ने विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव कारोबार के नियम सख्त किए थे। इसके तहत निरस्त विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव सौदों को दोबारा बुक करने पर रोक लगाई गई और बैंकों को डॉलर की खरीद पर 20 प्रतिशत आरक्षित राशि रखने को कहा गया।

कच्चे तेल के आयात पर बड़ी रकम खर्च करने वाली तीन सरकारी पेट्रोलियम विपणन कंपनियों के लिए विशेष डॉलर सुविधा मौजूदा बाजार स्थितियों के आकलन के आधार पर शुरू की गई है।

मल्होत्रा ने कहा, ‘‘विदेशी मुद्रा बाजार का मुख्य उद्देश्य वास्तविक जरूरतों को पूरा करना और विनिमय दर के जोखिम से बचाव करना है। शेयर बाजार के विपरीत, जहां निवेशक कीमतों में बदलाव को लेकर अपनी राय के आधार पर कारोबार कर सकते हैं, विदेशी मुद्रा बाजार मुख्य रूप से वास्तविक जरूरतों और जोखिम से बचाव के लिए है।’’

उन्होंने एक सवाल के जवाब में कहा कि आरबीआई ने बाजार में अत्यधिक उतार-चढ़ाव और एकतरफा सट्टेबाजी देखी थी, जिससे बाजार की ताकतों के लिए रुपये का वास्तविक मूल्य तय करना मुश्किल हो रहा था।

आरबीआई गवर्नर ने कहा कि भारत की आर्थिक वृद्धि अच्छी है और बैंक पर्याप्त पूंजी से लैस होने के साथ मुनाफा भी कमा रहे हैं। कंपनियों के निवेश के शुरुआती संकेत हैं और उनकी आय में वृद्धि सुधर रही है। परिवारों की वित्तीय स्थिति भी मजबूत है, हालांकि उन पर कर्ज का बोझ बढ़ा है।

उन्होंने कहा कि भारत की व्यापक आर्थिक स्थिति और वित्तीय संस्थान मजबूत हैं, लेकिन बदलती भू-राजनीतिक परिस्थितियों और उनके अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले असर पर करीबी नजर रखने की जरूरत है।

भाषा प्रेम प्रेम अजय

अजय