जयपुर, 14 अक्टूबर (भाषा) राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने बुधवार को कहा कि श्रेष्ठता केवल भौतिक पैमानों से नहीं, बल्कि वैचारिक, नैतिक और व्यावहारिक शुद्धता से भी तय होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि मानक ही वह पैमाना हैं जो किसी भी समाज, उत्पाद या विचार को सामान्य से 'श्रेष्ठ' की श्रेणी में ले जाते हैं।
बागडे बुधवार को यहां भारतीय मानक ब्यूरो के 'विश्व मानक दिवस समारोह' को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने भारतीय मानक ब्यूरो द्वारा गुणवत्ता और मानकीकरण का महत्व समझाने के साथ-साथ उपभोक्ताओं को रचनात्मकता, नवाचार और वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने के लिए भी जागरूक किए जाने पर जोर दिया।
आधिकारिक बयान के अनुसार प्राचीन भारतीय परंपरा में निर्धारित मानकों की चर्चा करते हुए बागडे ने कहा कि श्रेष्ठता भारतीय जीवन का आधार रही है।
उन्होंने भारतीय मानक ब्यूरो द्वारा श्रेष्ठता के लिए तय मानकों को महत्वपूर्ण बताया और कहा कि सेवा और उत्पाद के अंतर्गत आईएसआई, आईएसओ, आईसी मानकों की श्रेष्ठता के प्रति शहरों के साथ-साथ गांवों में भी जागरूकता का प्रसार हो।
उन्होंने कहा कि जब हम कड़े मानकों का पालन करते हैं, तो हमारे उत्पाद और सेवाएं वैश्विक स्तर पर भारत की श्रेष्ठता और साख को मजबूत करते हैं।
राज्यपाल ने भारतीय उत्पादों की गुणवत्ता, नवाचार और विश्वसनीयता के लिए भी निरंतर प्रयास किए जाने पर जोर दिया।
भाषा पृथ्वी
संतोष
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