(अदिति खन्ना)
लंदन, 14 अक्टूबर (भाषा) ब्रिटेन के गृह मंत्रालय की ओर से छात्र वीजा के नियमों में सख्ती किए जाने के बीच यहां के विश्वविद्यालय दाखिले के प्रस्ताव वापस ले रहे हैं, जिसकी वजह से भारत और दूसरे देशों के छात्रों के प्रभावित होने की आशंका है। इस सप्ताह मीडिया में प्रकाशित एक विश्लेषण में यह बात सामने आई है।
‘फाइनेंशियल टाइम्स’ समाचार पत्र को आधिकारिक आंकड़ों का विश्लेषण करने पर पता चला है कि विश्वविद्यालय इस डर से छात्रों को दिए गए दाखिले के प्रस्ताव वापस ले रहे हैं कि कहीं उन्हें विदेशी छात्रों को दाखिले देने पर पूरी तरह प्रतिबंध का सामना न करना पड़े।
ब्रिटेन के गृह मंत्रालय के नियमों के अनुसार, जिन शिक्षण संस्थानों में दाखिले का प्रस्ताव पाने वाले विदेशी छात्रों में से पांच प्रतिशत से अधिक के वीजा आवेदन बाद में खारिज हो जाते हैं, उन संस्थानों पर विदेशी छात्रों को दाखिला देने पर प्रतिबंध लगने का खतरा रहता है।
पहले यह सीमा 10 प्रतिशत थी, जिसे घटाकर पांच प्रतिशत कर दिया गया।
ब्रिटिश सरकार के अनुसार इस सख्ती का उद्देश्य कुछ देशों के नागरिकों द्वारा छात्र वीजा व्यवस्था के दुरुपयोग को रोकना है, जिनमें पाकिस्तान और नाइजीरिया के नागरिक सबसे आगे हैं।
विदेशी छात्रों को दाखिला देने वाले संस्थानों का प्रतिनिधित्व करने वाले संगठन ‘यूनिवर्सिटीज यूके इंटरनेशनल’ (यूयूकेआई) के निदेशक जेमी एरोस्मिथ ने कहा, “कई वीजा आवेदन गलत, असंगत व अत्यधिक व्यक्तिपरक कारणों के आधार पर खारिज किए जा रहे हैं। इसके कारण विश्वविद्यालयों को तय सीमा का उल्लंघन करने से बचने के लिए बड़ी संख्या में दाखिले के प्रस्ताव वापस लेने पड़ रहे हैं।”
उन्होंने स्वीकार किया कि आव्रजन व्यवस्था में लोगों का भरोसा बनाए रखना जरूरी है। साथ ही उन्होंने कहा कि “वीजा प्रक्रिया अब पहले की तुलना में काफी कम भरोसेमंद व अप्रत्याशित हो गई है।”
‘फाइनेंशियल टाइम्स’ ने गृह मंत्रालय के आंकड़ों के विश्लेषण के आधार पर बताया कि इस साल की पहली छमाही में ब्रिटेन के अध्ययन वीजा के कुल आवेदनों में से 10.5 प्रतिशत आवेदन वापस ले लिए गए। पिछले साल की इसी अवधि में यह आंकड़ा 2.3 प्रतिशत और 2023 में 0.4 प्रतिशत था।
इस साल के पहले छह महीनों में पाकिस्तान के संभावित छात्रों के लगभग 40.9 प्रतिशत वीजा आवेदन वापस ले लिए गए, जबकि पिछले साल की इसी अवधि में यह आंकड़ा तीन प्रतिशत था।
इसके बाद नाइजीरिया का स्थान रहा, जहां इस साल की पहली छमाही में अध्ययन वीजा के 22.7 प्रतिशत आवेदन वापस लिए गए। 2025 की पहली छमाही में यह आंकड़ा 4.5 प्रतिशत था। बांग्लादेश के मामले में वापस लिए गए आवेदनों का प्रतिशत 7.1 से बढ़कर 23.5 प्रतिशत हो गया, जबकि भारत के मामले में यह 1.2 प्रतिशत से बढ़कर 5.2 प्रतिशत हो गया।
संडरलैंड विश्वविद्यालय के कुलपति सर डेविड बेल ने समाचार पत्र से कहा, “हाल ही में और अप्रत्याशित रूप से वीजा आवेदन खारिज होने के मामलों में हुई बढ़ोतरी के कारण कई विश्वविद्यालयों ने पहले से ही कदम उठाने शुरू कर दिए हैं।”
समाचार पत्र ने उच्च शिक्षा क्षेत्र के आंकड़ों का हवाला देते हुए यह भी बताया कि माना जा रहा है कि इस साल लगभग 15 विश्वविद्यालयों ने पाकिस्तानी छात्रों के दाखिले पर पूरी तरह रोक लगा दी है।
ईस्ट एंग्लिया विश्वविद्यालय के उपकुलपति प्रोफेसर स्टीवन मैकगायर ने कहा कि इस नीति के कारण ब्रिटिश विश्वविद्यालय चीन और भारत पर अपना ध्यान और अधिक केंद्रित कर सकते हैं, क्योंकि इन देशों के छात्रों के वीजा आवेदन खारिज होने की दर कम है।
भाषा जोहेब रंजन
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