(फाइल फोटो के साथ)
नयी दिल्ली, 14 अक्टूबर (भाषा) केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने बिजली ग्रिड को कृत्रिम मेधा (एआई) से सक्षम बनाने की सरकार की योजना पर बुधवार को जोर दिया। इसके तहत बिजली उत्पादन, पारेषण और वितरण के स्तर पर मांग का पूर्वानुमान लगाया जा सकेगा।
केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (सीईए) और उद्योग मंडल ‘फिक्की’ की ओर से ‘भारतीय बिजली क्षेत्र को एआई से सक्षम बनाने’ विषय पर आयोजित विचार-विमर्श सम्मेलन में वीडियो संदेश के जरिये बिजली मंत्री ने कहा कि वित्त वर्ष 2026-27 में 70 गीगावाट क्षमता जुड़ने की उम्मीद है और आगे इसे चार गुना बढ़ाने का लक्ष्य है। भारत की स्थापित बिजली उत्पादन क्षमता करीब 555 गीगावाट (एक गीगावाट बराबर 1000 मेगावाट) है।
मंत्री ने कहा, ‘‘हमारा लक्ष्य केवल उत्पादन बढ़ाना और क्षमता स्थापित करना नहीं है। बिजली ग्रिड के प्रबंधन और मांग का पूर्वानुमान लगाने में एआई की भूमिका यहीं सामने आती है।’’
उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य ऐसा बिजली ग्रिड तैयार करना है, जो बिजली की मांग और ग्रिड में बिजली के एकीकरण को समझ सके। आगे देश में केवल ताप बिजली ही नहीं, बल्कि गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित बिजली उत्पादन क्षमता भी स्थापित की जानी है।
कार्यक्रम में केंद्रीय बिजली राज्य मंत्री श्रीपद नाइक ने भी देश की बदलती ऊर्जा जरूरतों के बीच सेवाओं की आपूर्ति और बिजली प्रबंधन में सुधार के लिए बिजली क्षेत्र में कृत्रिम मेधा (एआई) को प्रभावी ढंग से अपनाने की वकालत की।
नाइक ने कहा, ‘‘चाहे बिजली उत्पादन हो, पारेषण या वितरण, एआई हमें व्यवस्था को अधिक कुशलता से चलाने और उपभोक्ताओं को बेहतर सेवाएं देने में मदद कर सकता है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘ग्रिड में अधिक नवीकरणीय ऊर्जा आने के साथ हमें संसाधनों की योजना बनाने और बिजली आपूर्ति का प्रबंधन करने के लिए अधिक स्मार्ट उपकरणों की जरूरत है। नीति और प्रौद्योगिकी को साथ-साथ आगे बढ़ना होगा, ताकि हर घर को बिना किसी रुकावट के बिजली मिल सके।’’
भाषा निहारिका योगेश
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