नयी दिल्ली, 13 अक्टूबर (भाषा) इन्फोसिस के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) एवं प्रबंध निदेशक सलिल पारेख ने मंगलवार को कहा कि कंपनी की कृत्रिम मेधा (एआई) सेवाओं का योगदान पिछले तिमाही में उसके कुल राजस्व में आठ प्रतिशत से अधिक रहा और इसमें तिमाही आधार पर दो अंक की दर से वृद्धि हो रही है।
उन्होंने कहा कि मौजूदा रफ्तार बनी रहने पर दो से तीन साल में कंपनी के लगभग आधे काम में इन सेवाओं की हिस्सेदारी हो सकती है।
पारेख ने कहा कि एआई एजेंट बनाने, ग्राहकों के लिए कोडिंग करने और पुरानी प्रौद्योगिकी को आधुनिक बनाने जैसे कामों से जुड़ा यह कारोबार कंपनी के कुल आकार की तुलना में अभी छोटा है, लेकिन तेजी से बढ़ रहा है। मौजूदा रफ्तार जारी रहने पर कुछ तिमाहियों में कंपनी के कुल काम में इसकी हिस्सेदारी 20 से 30 प्रतिशत तक पहुंच सकती है।
उन्होंने ब्लूमबर्ग 'न्यू इकॉनमी फोरम 2026’ में कहा, “इसमें शानदार रफ्तार से वृद्धि हो रही है। यदि हम अगली कुछ तिमाहियों के लिए इसी रफ्तार का अनुमान लगाएं, तो कुछ तिमाहियों में ही हमारे कुल काम में इसकी हिस्सेदारी 20 से 30 प्रतिशत तक पहुंच सकती है और शायद दो-तीन साल में हमारे लगभग आधे काम में इसकी हिस्सेदारी होगी।”
उन्होंने कहा कि यह वृद्धि ऐसी सेवाओं की भारी मांग को दर्शाती है।
कृत्रिम मेधा के विकास के बीच भारत के सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) सेवा उद्योग की व्यवहार्यता से जुड़े सवाल पर पारेख ने कहा, “मेरे विचार से यह इन्फोसिस के लिए अच्छी खबर है और इसी नजरिये से भारत में प्रौद्योगिकी सेवाओं के लिए भी अच्छी खबर है।”
पारेख ने कहा कि इन्फोसिस ने पिछले साल कॉलेज से 20,000 नए स्नातकों की भर्ती की थी और चालू वित्त वर्ष में भी 20,000 स्नातकों की भर्ती करने की योजना है।
इन स्नातकों को एआई का प्रशिक्षण दिया जाता है। इसके बाद वे ग्राहकों के साथ मिलकर इस प्रौद्योगिकी को लागू करने और उससे जुड़े बदलावों के प्रबंधन का काम करते हैं।
उन्होंने कहा कि इन्फोसिस के तीन लाख कर्मचारियों में से करीब 80,000 पहले से ही ग्राहकों के लिए कोडिंग से जुड़े उपकरणों और कंपनी की कुछ आंतरिक परियोजनाओं पर काम कर रहे हैं।
भाषा योगेश अजय
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