मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में अयोध्या का दीपोत्सव अब आस्था और परंपरा के साथ स्थानीय कारीगरों के लिए रोजगार का बड़ा अवसर भी बन रहा है। दीपोत्सव को भव्य स्वरूप दिए जाने से मिट्टी के दीयों की मांग बढ़ी है। इसका सीधा लाभ कुम्हार परिवारों को मिल रहा है। बड़े ऑर्डर मिलने से जहां उनकी आमदनी बढ़ रही है, वहीं स्थानीय युवा भी पारंपरिक मिट्टी कला से जुड़कर अपने भविष्य को संवार रहे हैं।
जयसिंहपुर, विद्याकुंड और सोहावल के ड्योढ़ी जैसे गांवों में कुम्हार परिवार दीपोत्सव की तैयारियों में जुटे हैं। घरों में मिट्टी गूंथने, दीये बनाने और उन्हें सुखाने का काम तेजी से चल रहा है। दीपोत्सव ने पारंपरिक कला को नई पहचान देने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ाए हैं।
कुम्हार परिवारों को मिले लाखों दीयों के ऑर्डर
जयसिंहपुर गांव के बृज किशोर प्रजापति बताते हैं कि दीपोत्सव शुरू होने के बाद से उनका पूरा परिवार लगातार दीये बनाने में जुटा है। इस बार उन्हें एक लाख दीये बनाने का ऑर्डर मिला, जिसे समय पर तैयार कर पहुंचा दिया गया।
इसी गांव के राजेश प्रजापति को दो लाख दीये बनाने का ऑर्डर मिला। उनके परिवार के सदस्य भी इस काम में हाथ बंटाते हैं। राजेश के मुताबिक, पहले पूरे महीने में मुश्किल से 20 से 25 हजार रुपये की कमाई हो पाती थी, लेकिन अब दीपोत्सव के मौसम में ही लाखों रुपये की आमदनी का अवसर मिलता है।
बड़े ऑर्डर मिलने से कुम्हार परिवारों को अपने ही गांव और आसपास के क्षेत्रों में रोजगार मिल रहा है। इससे युवाओं को काम की तलाश में दूसरे शहरों की ओर जाने की जरूरत भी कम हो रही है।
इलेक्ट्रिक चाक से बढ़ा उत्पादन, काम हुआ आसान
कुम्हार परिवारों को इलेक्ट्रिक चाक उपलब्ध होने से दीये बनाने के काम में तेजी आई है। आधुनिक उपकरणों के इस्तेमाल से उत्पादन क्षमता बढ़ने के साथ दीयों की गुणवत्ता में भी सुधार हुआ है।
जयसिंहपुर, विद्याकुंड और सोहावल के ड्योढ़ी गांव में कारीगर दीपोत्सव के लिए बड़ी संख्या में दीये तैयार कर रहे हैं। मिट्टी के दीयों को प्राथमिकता मिलने से स्थानीय कारीगरों को बड़े ऑर्डर मिल रहे हैं। इससे पारंपरिक कला को आगे बढ़ाने और परिवारों की आजीविका मजबूत करने में मदद मिल रही है।
राम की पैड़ी पर 30 लाख दीप जलाने का लक्ष्य
अयोध्या में दसवें दीपोत्सव के लिए 7 नवंबर को राम की पैड़ी पर 30 लाख दीप प्रज्ज्वलित करने का लक्ष्य रखा गया है। आयोजन की तैयारियां तेजी से चल रही हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, क्वीन हो मेमोरियल पार्क में 17.64 लाख दीये घाट स्थित गोदाम में रखे गए हैं।
दीपोत्सव की तैयारियों में अवध विश्वविद्यालय के छात्र, अधिकारी और स्वयंसेवी संगठन भी जुटे हैं। आयोजन की व्यवस्थाओं में सहयोग के लिए करीब 35 हजार स्वयंसेवकों को लगाया गया है।
दीपोत्सव से मजबूत हो रही स्थानीय अर्थव्यवस्था
अयोध्या का दीपोत्सव कुम्हार परिवारों के लिए अपनी पारंपरिक कला को रोजगार से जोड़ने का माध्यम बन रहा है। मिट्टी के दीयों की बढ़ती मांग, बड़े ऑर्डर और आधुनिक उपकरणों के इस्तेमाल से कारीगरों को काम बढ़ाने के अवसर मिल रहे हैं।
योगी सरकार के नेतृत्व में दीपोत्सव को भव्य स्वरूप दिए जाने से स्थानीय कारीगरों की भागीदारी बढ़ी है। इससे पारंपरिक मिट्टी कला को नई पहचान मिल रही है और स्थानीय स्तर पर आत्मनिर्भरता के अवसर मजबूत हो रहे हैं।