नयी दिल्ली, 13 अक्टूबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को उस याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया जिसमें आरोप लगाया गया था कि उत्तर प्रदेश आतंकवाद निरोधक दस्ता (एटीएस) के कर्मचारी बिना सही वर्दी पहने या पहचान-पत्र दिखाए याचिकाकर्ता के घर में घुस गए थे।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची तथा न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने याचिकाकर्ता वाइज खान के वकील से कहा कि वे राहत के लिए इलाहाबाद उच्च न्यायालय जाएं।
सुनवाई के दौरान, पीठ ने शुरुआत में ही याचिका पर विचार करने में अनिच्छा जताई। पीठ ने कहा कि खान ने पहले उच्च न्यायालय जाने के बजाय सीधे संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत उच्चतम न्यायालय का रुख किया।
अनुच्छेद 32 हर नागरिक को अपने मौलिक अधिकारों को लागू करवाने के लिए सीधे उच्चतम न्यायालय जाने का अधिकार देता है।
वकील ने कहा, “अगर मैं अनुच्छेद 32 के तहत आ रहा हूं, तो उच्चतम न्यायालय (इससे पीछे नहीं हट सकता)।”
न्यायमूर्ति बागची ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 32 और 226 मौलिक अधिकारों के उल्लंघन से जुड़े मामलों में एक-दूसरे से मिलते-जुलते अधिकार क्षेत्र प्रदान करते हैं।
अनुच्छेद 226 हर उच्च न्यायालय को मौलिक अधिकारों को लागू करने के लिए निर्देश, आदेश या रिट जारी करने का अधिकार देता है।
न्यायमूर्ति बागची ने कहा कि आम तौर पर अधीनस्थ अदालत को ऐसे आरोपों की जांच करने की अनुमति दी जानी चाहिए।
न्यायमूर्ति बागची ने कहा, “हम हमेशा यही चाहेंगे कि मौलिक अधिकारों के उल्लंघन का संज्ञान अधीनस्थ अदालत ही ले।”
पीठ ने आदेश दिया, “याचिका पर विचार करने का कोई आधार नहीं बनता। याचिका खारिज की जाती है। याचिकाकर्ता, अगर चाहें तो, उच्च न्यायालय जा सकते हैं।”
भाषा प्रशांत अविनाश
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