नयी दिल्ली, 13 अक्टूबर (भाषा) आदित्य बिड़ला समूह के चेयरमैन कुमार मंगलम बिड़ला ने मंगलवार को कहा कि कंपनियों को कृत्रिम मेधा (एआई) में निवेश का फैसला उससे मिलने वाले संभावित लाभ को ध्यान में रखकर करना चाहिए, न कि पीछे छूट जाने के डर से जल्दबाजी में।
बिड़ला ने यहां 'ब्लूमबर्ग न्यू इकॉनमी फोरम' में कहा कि अब कंपनियां एआई के लिए कंप्यूटिंग क्षमता और प्रतिभाओं की होड़ से आगे बढ़कर इस बात का आकलन कर रही हैं कि इस प्रौद्योगिकी में निवेश से कितना लाभ मिल सकता है।
उन्होंने कहा कि आदित्य बिड़ला समूह एआई में निवेश की गति एक साल पहले की योजना के मुकाबले कुछ धीमी रखेगा।
उन्होंने एआई से जुड़ी आशंकाओं पर कहा, “एक साल पहले हमें लगता था कि एआई एक ऐसा ‘दानव’ है, जो आखिरी कतार में बैठा है और अगर मुझे इसके बारे में सब कुछ नहीं पता होगा तो मेरे पास पहुंचने तक वह मुझे खा जाएगा।”
बिड़ला ने एक परिचर्चा में कहा कि कंपनियां अब यह समझने की कोशिश कर रही हैं कि एआई से क्या हासिल किया जा सकता है और उसमें निवेश करने पर कितना प्रतिफल मिल सकता है।
उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि हम एआई में निवेश एक साल पहले की अपनी सोच के मुकाबले कुछ धीरे-धीरे करेंगे, क्योंकि इसमें बड़ा निवेश करना पड़ता है। मुझे नहीं लगता कि हमें पीछे छूट जाने के डर से कोई कदम उठाना चाहिए।”
उन्होंने कहा कि अलग-अलग कारोबार में एआई का इस्तेमाल भी अलग होगा। कुछ क्षेत्रों में इससे ग्राहकों के साथ संवाद बेहतर हो सकता है, जबकि अन्य में विनिर्माण दक्षता और वित्तीय सेवाओं में शुद्ध ब्याज मार्जिन (एनआईएम) सुधारने में मदद मिल सकती है।
बिड़ला ने कहा, “हमारे जैसे विविध कारोबार वाले समूह के लिए एक ही तरीका सभी पर लागू नहीं हो सकता। पूरे संगठन की उत्पादकता पर एआई के प्रभाव का आकलन अभी किया जा रहा है।”
कारोबार के सामने मौजूद चुनौतियों पर बिड़ला ने कहा कि पूंजी के आवंटन का फैसला करना लगातार मुश्किल होता जा रहा है। कंपनियों को एक ओर मौजूदा कारोबार में निवेश जारी रखना पड़ता है, वहीं दूसरी ओर नए कारोबारी अवसरों और मांग का भी ध्यान रखना होता है।
उन्होंने कहा, “आप आगे बढ़ना रोक नहीं सकते। या तो आप बढ़ते हैं या पीछे चले जाते हैं। आप एक ही स्थिति में बने नहीं रह सकते।”
उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर काम करने वाली कंपनी होने के कारण समूह को भू-राजनीतिक घटनाक्रमों के असर का भी सामना करना पड़ता है।
आदित्य बिड़ला समूह छह महाद्वीपों के 41 देशों में 20 से अधिक क्षेत्रों में कारोबार करता है। समूह में 2.27 लाख से अधिक कर्मचारी हैं और इसकी 600 से अधिक विनिर्माण इकाइयां हैं।
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