चेन्नई, 13 अक्टूबर (भाषा) मद्रास उच्च न्यायालय ने मंगलवार को तमिलनाडु विधानसभा अध्यक्ष जेसीडी प्रभाकर के उस फैसले को बरकरार रखा, जिसमें अन्नाद्रमुक के छह विधायकों के इस्तीफे स्वीकार किए गए थे।
ये विधायक बाद में सत्तारूढ़ तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके) में शामिल हो गए थे।
मुख्य न्यायाधीश सुश्रुत अरविंद धर्माधिकारी और न्यायमूर्ति जी. अरुल मुरुगन की प्रथम पीठ ने विधानसभा में अन्नाद्रमुक के सचेतक अग्री एसएस कृष्णमूर्ति की ओर से दायर याचिका पर यह व्यवस्था दी। याचिका में विधानसभा अध्यक्ष के फैसले को चुनौती दी गई थी। पीठ ने प्रभाकर के फैसले को बरकरार रखा।
पीठ ने विधानसभा अध्यक्ष को निर्देश दिया कि वह अन्नाद्रमुक के सचेतक कृष्णमूर्ति की उस याचिका पर दो महीने के भीतर फैसला लें, जिसमें विधायकों एस. जयकुमार, मरगथम कुमारवेल, पी. सत्यभामा और एसक्की सुबैया को अयोग्य घोषित करने का अनुरोध किया गया था।
पेरुंदुरई, मदुरांतकम और धारापुरम विधानसभा क्षेत्रों से निर्वाचित क्रमश: जयकुमार, कुमारवेल और सत्यबामा ने 25 मई 2026 को विधानसभा सदस्य के तौर पर इस्तीफा दे दिया था।
अंबासमुद्रम विधानसभा क्षेत्र से निर्वाचित एसाक्की सुब्बाया ने अगले दिन इस्तीफा दे दिया। वहीं, सी. विजयभास्कर (विरालिमलाई) और एम. आर. विजयभास्कर (करूर) ने क्रमशः 16 और 29 जून को विधायक पद से इस्तीफा दिया था।
इन सभी विधायकों ने अप्रैल में हुए तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में अन्नाद्रमुक के टिकट पर जीत हासिल की थी। बाद में वे मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली सत्तारूढ़ टीवीके में शामिल हो गए।
मरगथम कुमारवेल और सत्यबामा ने छह अक्टूबर को क्रमश: मदुरांतकम और धारापुरम विधानसभा क्षेत्रों में हुए उपचुनाव में टीवीके के उम्मीदवार के रूप में जीत हासिल की।
पीठ ने कृष्णमूर्ति की याचिका और देसीय मक्कल शक्ति काची द्वारा दायर जनहित याचिका पर यह आदेश पारित किया।
अदालत ने कहा कि विधायकों के इस्तीफे वास्तविक हैं और स्वेच्छा से दिए गए थे तथा वे संविधान की 10वीं अनुसूची के प्रावधानों के अनुसार हैं।
भाषा
सुभाष अविनाश
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