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विकसित भारत का लक्ष्य हासिल करने को मजबूत सांख्यिकी प्रणाली जरूरी: पी के मिश्रा

नयी दिल्ली, 13 अक्टूबर (भाषा) प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव पी के मिश्रा ने मंगलवार को कहा कि भारत को साक्ष्य-आधारित नीतियां बनाने और 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने का लक्ष्य हासिल करने के लिए आधुनिक, भरोसेमंद और प्रौद्योगिकी युक्त सांख्यिकी प्रणाली की जरूरत है।

मिश्रा ने यहां सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के राज्यों के योजना, वित्त और सूचना प्रौद्योगिकी सचिवों के सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए राज्य स्तर पर सांख्यिकी संस्थानों को मजबूत करने, केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने तथा आंकड़ा प्रणालियों के बेहतर एकीकरण की जरूरत बतायी।

उन्होंने कहा, ‘‘हमारी सांख्यिकी व्यवस्था उतनी ही आधुनिक और महत्वाकांक्षी होनी चाहिए, जितनी हमारी राष्ट्रीय आकांक्षाएं हैं।’’ उन्होंने सांख्यिकी को केवल प्रशासनिक आवश्यकता के बजाय राष्ट्रीय रणनीतिक संपत्ति बताया।

मिश्रा ने कहा कि भारत की सांख्यिकी प्रणालियों को तेजी से डिजिटल, संगठित और परस्पर जुड़ी अर्थव्यवस्था के अनुरूप विकसित होना चाहिए। आधार वर्ष 2022-23 के साथ नई राष्ट्रीय लेखा श्रृंखला शुरू करने तथा उपभोक्ता मूल्य सूचकांक और औद्योगिक उत्पादन सूचकांक की अद्यतन श्रृंखला से बदलती परिस्थितियों के अनुरूप आर्थिक माप करने में मदद मिलेगी।

आधिकारिक बयान के अनुसार, मिश्रा ने आधिकारिक आंकड़ों की समयबद्धता और सटीकता बढ़ाने में कृत्रिम मेधा (एआई), मशीन लर्निंग, भू-स्थानिक प्रणालियों और उपग्रह से प्राप्त तस्वीरों की भूमिका का भी जिक्र किया।

हालांकि, उन्होंने आगाह किया कि प्रौद्योगिकी खराब गुणवत्ता वाले आंकड़ों की भरपाई नहीं कर सकती। आंकड़े तेजी से जुटाने के प्रयास में गुणवत्ता से समझौता नहीं होना चाहिए और आंकड़ों तक व्यापक पहुंच सुनिश्चित करते समय उनकी गोपनीयता भी बरकरार रहनी चाहिए।

मिश्रा ने कहा कि भारत की विकास संबंधी प्राथमिकताओं के लिए राज्य, जिला और स्थानीय स्तर पर अधिक विस्तृत आंकड़ों की जरूरत है। मजबूत सांख्यिकी प्रणालियों से सरकारों को नीतियों के परिणामों का आकलन करने, क्षेत्रीय असमानताओं की पहचान करने और यह सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी कि सार्वजनिक धन का इस्तेमाल अपेक्षित नतीजे हासिल करने के लिए हो।

उन्होंने कहा कि 2047 तक भारत के विकास का मार्गदर्शन करने वाली भरोसेमंद, पारदर्शी और परस्पर अनुकूल सांख्यिकी व्यवस्था तैयार करने के लिए सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय, राज्य सांख्यिकी कार्यालयों, वित्त एवं योजना विभागों, नीति आयोग और शैक्षणिक संस्थानों को मिलकर काम करना चाहिए।

भाषा रमण अजय

अजय