नयी दिल्ली, 13 अक्टूबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को उस याचिका पर 15 अक्टूबर को सुनवाई करने के लिए सहमति जताई, जिसमें अदालत परिसर के भीतर राजनीतिक प्रदर्शनों पर पूरी तरह से रोक लगाने और न्यायिक कामकाज में बाधा डालने वाले नेताओं के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू करने का अनुरोध किया गया है।
याचिका में सोमवार को उच्चतम न्यायालय परिसर में उमड़ी भारी भीड़ का जिक्र किया गया है, जब कांग्रेस नेता राहुल गांधी और अन्य ने मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया से संबंधित याचिका दायर करने के लिए शीर्ष अदालत तक मार्च किया था।
वरिष्ठ अधिवक्ता एवं भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता गौरव भाटिया ने प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी मोहना की पीठ के समक्ष मामले का विशेष उल्लेख किया।
पीठ ने दिल्ली में विरोध-प्रदर्शनों से जुड़ी अन्य याचिकाओं के साथ इस याचिका को भी बृहस्पतिवार को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने पर सहमति जताई।
भाटिया ने याचिका पर तुरंत सुनवाई का अनुरोध करते हुए कहा कि एक वकील ने सोमवार को उच्चतम न्यायालय में हुई घटना के संबंध में इसे दायर किया है।
याचिका में केंद्र सरकार, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष एवं राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाद्रा, समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख अखिलेश यादव और अन्य को प्रतिवादी बनाया गया है।
एसआईआर प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर राष्ट्रीय राजधानी में कई दिन से विरोध-प्रदर्शन हो रहे हैं।
याचिका में एसआईआर के दौरान मतदाता सूची से हटाए गए नामों और उसमें किए गए बदलावों की समयबद्ध एवं स्वतंत्र जांच के लिए उच्चतम न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में तकनीकी विशेषज्ञों और अन्य प्रतिष्ठित नागरिकों की एक स्वतंत्र समिति गठित करने का अनुरोध किया गया है।
याचिका में यह सुनिश्चित करने का निर्देश देने का आग्रह किया गया है कि किसी भी मतदाता का नाम कानून के अनुसार नोटिस जारी किए बिना और अपना पक्ष रखने का उचित मौका दिए बिना मतदाता सूची से नहीं हटाया जाए।
इसमें यह सुनिश्चित करने का भी अनुरोध किया गया है कि पंजाब और अन्य चुनावी राज्यों में पात्र लोगों को कानून के तहत निर्धारित अंतिम तिथि तक मतदाता सूची में नाम शामिल कराने के लिए आवेदन करने की अनुमति दी जाए।
भाषा पारुल सुरेश
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