(सागर कुलकर्णी)
वाशिंगटन, 13 अक्टूबर (भाषा) अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने मजबूत घरेलू मांग और सेवा क्षेत्र की बेहतर गतिविधियों के चलते चालू वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की आर्थिक वृद्धि दर का अनुमान बढ़ाकर सात प्रतिशत कर दिया है।
आईएमएफ ने बैंकॉक में अपनी सालाना बैठक के दौरान जारी विश्व आर्थिक परिदृश्य (डब्ल्यूईओ) रिपोर्ट में कहा कि भारत प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। वर्ष 2026 में इसकी वृद्धि दर सात प्रतिशत रहने का अनुमान है।
रिपोर्ट के मुताबिक, मजबूत घरेलू मांग और सेवा क्षेत्र की बेहतर गतिविधियों के कारण आर्थिक वृद्धि का प्रदर्शन पहले के अनुमान से बेहतर रहा है।
मुद्रा कोष ने इसके पहले जुलाई में भारत की वृद्धि दर 6.4 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया था।
इसके साथ ही आईएमएफ ने वित्त वर्ष 2027-28 के लिए भी भारत की वृद्धि दर का अनुमान जुलाई के 6.7 प्रतिशत से बढ़ाकर सात प्रतिशत कर दिया है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के बावजूद घरेलू मांग और सेवा क्षेत्र के दम पर भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है।
मध्यम अवधि के परिदृश्य पर आईएमएफ ने कहा कि भारत उन देशों में शामिल है जिनका वृद्धि दर अनुमान बढ़ाया गया है। इसका कारण आर्थिक गतिविधियों में निरंतर तेजी और मजबूत वृद्धि क्षमता के संकेत हैं। अनुकूल जनसांख्यिकीय परिस्थितियों, विशाल एवं लगातार बढ़ते घरेलू बाजार तथा संरचनात्मक सुधार जारी रहने से इस क्षमता को समर्थन मिल रहा है।
रिपोर्ट के मुताबिक, 2028 से 2031 के दौरान वैश्विक अर्थव्यवस्था की औसत सालाना वृद्धि दर 3.2 प्रतिशत रहने का अनुमान है। यह कोविड महामारी से पहले 2000 से 2019 के दौरान दर्ज 3.7 प्रतिशत की औसत वृद्धि दर से कम है।
आईएमएफ ने कहा कि जनवरी, 2026 के मुकाबले मध्यम अवधि की वृद्धि संभावनाओं में असमानता बढ़ी है। अनुमान में कटौती मुख्यतः पश्चिम एशिया संघर्ष से सीधे प्रभावित अर्थव्यवस्थाओं और भारत को छोड़कर अन्य क्षेत्रों की ऊर्जा आयात करने वाली उभरती तथा विकासशील अर्थव्यवस्थाओं में केंद्रित है।
व्यापार के मोर्चे पर कहा गया है कि यूरोपीय संघ और दक्षिण अमेरिकी क्षेत्रीय एकीकरण समूह (मर्कोसुर) के साथ व्यापार समझौतों तथा ब्रिटेन के साथ भारत के समझौते से शुल्क और गैर-शुल्क बाधाएं कम हो सकती हैं। इससे अर्थव्यवस्थाओं को हाल के व्यापार नीतिगत बदलावों के अनुरूप ढलने और आपूर्ति श्रृंखलाओं को अधिक मजबूत बनाने में मदद मिल सकती है।
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