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ताप वृद्धि को 1.8 डिग्री सेल्सियस तक सीमित रखने से बच सकते हैं स्वस्थ जीवन के 1.89 अरब वर्ष: रिपोर्ट

नयी दिल्ली, 13 अक्टूबर (भाषा) वैश्विक तापमान में वृद्धि को 4.4 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने देने के बजाय इसे लगभग 1.8 डिग्री सेल्सियस तक सीमित रखने से भीषण गर्मी और वायु प्रदूषण जैसे कारणों से स्वस्थ जीवन के 1.89 अरब वर्षों के नुकसान को रोका जा सकता है। ‘लैंसेट आयोग’ की एक नयी अध्ययन रिपोर्ट में यह दावा किया गया है।

शोधकर्ताओं ने कहा कि स्वास्थ्य पर पड़ने वाला वास्तविक बोझ इससे भी अधिक हो सकता है। उन्होंने कहा कि उत्सर्जन में तेजी से कटौती नहीं किए जाने पर वर्ष 2100 के बाद भी स्वास्थ्य संबंधी नुकसान बढ़ता रहेगा। इससे पलायन जैसे अन्य खतरे भी और गंभीर हो सकते हैं, जिनका असर अभी इन आंकड़ों में शामिल नहीं है।

जर्मनी के बर्लिन में विश्व स्वास्थ्य शिखर सम्मेलन 2026 में जारी ‘21वीं सदी में स्वास्थ्य के लिए वैश्विक खतरे’ पर लैंसेट आयोग की रिपोर्ट में शोधकर्ताओं ने सैकड़ों संभावित खतरों का अध्ययन किया।

उन्होंने वर्ष 2025 से 2100 के बीच मानव स्वास्थ्य और अस्तित्व के लिए सबसे बड़ा खतरा पैदा करने वाले 17 खतरों की पहचान की। शोधकर्ताओं ने कहा कि नीतिगत बदलावों, वित्तपोषण संबंधी फैसलों और नवाचार के जरिए इन खतरों को टाला भी जा सकता है।

शोधकर्ताओं ने कहा कि बीमारियों, सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियों, पर्यावरण में बदलाव, प्रौद्योगिकी और संघर्षों से जुड़े 17 परस्पर संबंधित ‘विनाशकारी’ खतरे अगली पीढ़ी के स्वास्थ्य को प्रभावित करेंगे।

विश्लेषण के अनुसार, यदि मौजूदा रुझान जारी रहे तो ये 17 विनाशकारी खतरे सामूहिक रूप से स्वस्थ जीवन के अरबों वर्ष गंवाने का कारण बन सकते हैं।

आयोग ने कहा कि हर देश इन खतरों से प्रभावित है, हालांकि खतरे के प्रकार और क्षेत्र के अनुसार उनका स्तर अलग-अलग है। हर देश में सीमित संसाधनों वाले लोगों और वंचित समुदायों पर इनका सबसे अधिक असर पड़ता है। मौजूदा असमानताओं के कारण उनकी मुश्किलें और बढ़ जाती हैं।

रिपोर्ट में परमाणु संघर्ष और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के दुर्भावनापूर्ण इस्तेमाल को ऐसे दो खतरों के रूप में पहचाना गया, जिनसे मानव अस्तित्व समाप्त होने का जोखिम है, हालांकि इनके घटित होने की आशंका कम आंकी गई है।

आयोग के आकलन के अनुसार, संभावित प्रभाव और खतरे की आशंका, दोनों को ध्यान में रखते हुए, परमाणु संघर्ष रोकने के लिए कदम उठाने से वर्ष 2100 तक अनुमानित 13.3 करोड़ मौतों और स्वस्थ जीवन के 9.35 अरब वर्षों के नुकसान को टाला जा सकता है। वहीं, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के दुर्भावनापूर्ण इस्तेमाल का खतरा कम करने के लिए कदम उठाने से स्वस्थ जीवन के अनुमानित 10.4 अरब वर्षों के नुकसान को रोका जा सकता है।

वाशिंगटन विश्वविद्यालय के स्वास्थ्य माप एवं मूल्यांकन संस्थान के निदेशक और आयोग के सह-अध्यक्ष क्रिस्टोफर जेएल मरे ने कहा, ‘‘ये अनुमान बताते हैं कि प्रत्येक क्षेत्र में स्वास्थ्य को होने वाले कितने नुकसान को रोका जा सकता है। इनमें से कुछ खतरे पहले से ही स्वास्थ्य पर भारी असर डाल रहे हैं, जबकि अन्य के सामने आने पर गंभीर खतरा पैदा हो सकता है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सभी 17 खतरे एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। इसलिए इनसे अलग-अलग नहीं, बल्कि एक साथ निपटने की जरूरत है।’’

मरे ने कहा, ‘‘चौंकाने वाली बात सिर्फ इन खतरों का व्यापक असर नहीं है, बल्कि यह भी है कि मानवता के पास अब भी इनसे निपटने के लिए कदम उठाने का विकल्प है। इन सभी 17 विनाशकारी खतरों के मामले में आज नेताओं द्वारा लिए गए फैसले अगली पीढ़ी के स्वास्थ्य और कल्याण को प्रभावित करेंगे। हालांकि, कार्रवाई में देरी करने से केवल भविष्य में इसकी कीमत बढ़ेगी और इसका बोझ आगे के लिए टल जाएगा।’’

भाषा

संतोष पवनेश

पवनेश