पेशावर, 13 अक्टूबर (भाषा) पेशावर उच्च न्यायालय में मंगलवार को पूर्व खैबर पख्तूनख्वा (केपीके) के मुख्यमंत्री सोहैल अफरीदी की तुरंत बरामदगी और उनके ठिकाने के बारे में स्पष्टीकरण की मांग वाली एक याचिका दायर की गई। यह याचिका संघीय सरकार द्वारा अशांत उत्तर-पश्चिमी प्रांत में गवर्नर का शासन और आपातकाल लागू किए जाने के दो दिन बाद आई है।
उत्तर-पश्चिमी प्रांत में कानून-व्यवस्था की बिगड़ती स्थिति के कारण रविवार को आपातकाल लागू होने के तुरंत बाद अफरीदी और पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के कई नेताओं को हिरासत में ले लिया गया था।
आपातकाल उस समय लगाया गया था जब पीटीआई, अफरीदी के नेतृत्व में एक विरोध मार्च निकाल रही थी, जिसमें जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की रिहाई और उनके लिए चिकित्सा उपचार की मांग की जा रही थी।
73 वर्षीय पूर्व क्रिकेटर खान 2023 से रावलपिंडी की अडियाला जेल में बंद हैं और भ्रष्टाचार तथा हिंसा भड़काने के आरोपों सहित 100 से अधिक मामलों का सामना कर रहे हैं।
पूर्व मुख्यमंत्री के भाई, मुहम्मद आमिर द्वारा दायर की गई इस याचिका में अदालत से मामले का तुरंत संज्ञान लेने और अफरीदी की सुरक्षित बरामदगी का आदेश देने का आग्रह किया गया है।
याचिका के अनुसार, अफरीदी को कथित तौर पर पेशावर के कैपिटल सिटी पुलिस ऑफिसर (सीसीपीओ) की उपस्थिति में हथियारों से लैस और नकाबपोश व्यक्तियों द्वारा अगवा किया गया था।
याचिकाकर्ता ने दावा किया कि ‘‘एक निर्वाचित मुख्यमंत्री का अपहरण संविधान, कानून और मौलिक मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन है।’’
याचिका में आगे कहा गया है कि मुख्यमंत्री के जीवन और स्वतंत्रता को गंभीर खतरा है और उनकी कथित अवैध हिरासत पाकिस्तान के संविधान के अनुच्छेद 4, 9, 10 और 14 का उल्लंघन करती है।
याचिकाकर्ता ने उनके ठिकाने, उन्हें हिरासत में रखने वालों की पहचान और उस कानूनी अधिकार के बारे में स्पष्टीकरण मांगा है जिसके तहत उन्हें कथित तौर पर हिरासत में रखा जा रहा है। याचिकाकर्ता ने यह भी अनुरोध किया कि इस कथित अपहरण की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच के आदेश दिए जाने चाहिए।
इससे पहले सोमवार को केपीके प्रांत में आपातकाल और गवर्नर शासन लगाने को चुनौती देने वाली एक अन्य याचिका भी पेशावर उच्च न्यायालय में दायर की गई थी।
राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने रविवार को कानून-व्यवस्था की बिगड़ती स्थिति का हवाला देते हुए केपीके में आपातकाल घोषित करने के लिए संविधान के अनुच्छेद 232(1) और 234(1) को लागू किया।
भाषा वैभव नरेश
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