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सेवानिवृत्त वैज्ञानिक को ‘डिटिजल अरेस्ट’ कर 1.25 करोड़ रु ठगे; 11 गिरफ्तार, विदेश से जुड़े हैं तार

नयी दिल्ली, 13 अक्टूबर (भाषा) दिल्ली पुलिस ने इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय से सेवानिवृत्त वैज्ञानिक को ‘डिजिटल अरेस्ट’ कर 1.25 करोड़ रुपये कथित रूप से ठगने के मामले में कंबोडिया और दक्षिण-पूर्व एशिया के अन्य देशों से संचालित साइबर धोखाधड़ी गिरोह का भंडाफोड़ कर 11 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी।

दिल्ली पुलिस की इंटेलिजेंस फ्यूजन एंड स्ट्रैटेजिक ऑपरेशंस (आईएफएसओ) इकाई ने बताया कि इस गिरोह की जांच के दौरान आंध्र प्रदेश में 79 वर्षीय व्यक्ति से जुड़े ‘डिजिटल अरेस्ट’ के अन्य मामले का पता चला जिसमें 10.25 करोड़ रुपये की ठगी की गई। इसने बताया कि पुलिस की तेज कार्रवाई के कारण 7.25 करोड़ रुपये बचा लिए गए।

एक अधिकारी ने बताया कि ‘डिजिटल अरेस्ट’ और निवेश धोखाधड़ी के मामलों में कार्रवाई करते हुए दो बैंक के खातों में जमा 1.96 करोड़ रुपये राशि के लेन देन पर रोक लगाई गई।

पुलिस ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों की पहचान उत्तर प्रदेश के एटा निवासी अनीस खान (31 ), पश्चिम बंगाल के उत्तर दिनाजपुर निवासी मोहम्मद महफूज-उर-रहमान (41) और इजहार आलम (34), जम्मू-कश्मीर के कठुआ निवासी अल्ताफ हुसैन (45 ), उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर निवासी इंतखाब (27), मेरठ के नीरज कुमार मित्तल और कंवर पाल, गजरौला के सैफ अली खान (30), हिमाचल प्रदेश के शिमला के रणबीर (32), दिल्ली के प्रभात राय उर्फ आशुतोष (34) और राजस्थान के हनुमानगढ़ के अनिल सागू उर्फ कृष्णा (31) के तौर पर हुई है।

पुलिस के अनुसार, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सेवानिवृत्त वैज्ञानिक 69 वर्षीय प्रदीप कुमार दास ने शिकायत दी थी कि 14 अगस्त को उन्हें फोन पर कुछ लोगों ने खुद को दिल्ली पुलिस, आतंकवाद निरोधक दस्ते (एटीएस) और राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) के अधिकारी बताया और आरोपियों ने उनके आधार कार्ड का धनशोधन मामले में दुरुपयोग होने की बात कहकर गिरफ्तारी की धमकी दी।

शिकायत में कहा गया कि धन की जांच के बहाने तीन बैंक खातों में 1.25 करोड़ रुपये अंतरित करा लिए। पुलिस ने कहा कि उन्होंने पीड़ित को लगातार वीडियो निगरानी में रखा और उनकी गतिविधियों को नियंत्रित किया।

इस मामले में विशेष प्रकोष्ठ थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई।

पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि जांच के दौरान पुलिस को सूचना मिली कि कुछ लोग साइबर अपराध के लिए बैंक खाते उपलब्ध करा रहे हैं और द्वारका के रामफल चौक के पास एक फ्लैट में रह रहे हैं जिसके बाद छापेमारी कर वहां से पांच आरोपियों को पकड़ा गया और जांच में एक संदिग्ध ‘एसएमएस टूल्स’ ऐप का भी पता चला, जिसका इस्तेमाल मोबाइल पर आने वाले संदेश और ‘ओटीपी’ (वन टाइम पासवर्ड) को विदेश में बैठे लोगों तक पहुंचाने के लिए किए जाने का संदेह है।

पुलिस के मुताबिक, अनीस खान कथित तौर पर विदेशी ठगों के संपर्क में था और खाते के संचालन में उसकी भूमिका थी और वह कथित तौर पर 5.5 प्रतिशत कमीशन लेता था, जो उसे क्रिप्टोकरेंसी में मिलता था और बाद में भारतीय रुपये में बदला जाता था।

पुलिस ने कहा कि दास से जुड़े मामले में बाद में छह अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।

पुलिस ने बताया कि इस गिरोह से जुड़े मामलों में आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा में 10.25 करोड़ रुपये की ‘डिजिटल अरेस्ट’ ठगी में से 7.25 करोड़ रुपये बचा लिए गए।

अधिकारी ने बताया कि पश्चिम बंगाल के पूर्व मेदिनीपुर में निवेश के नाम पर 21 लाख रुपये की ठगी का मामला भी सामने आया। दिल्ली के एक अन्य ‘डिजिटल अरेस्ट’ मामले में 77 लाख रुपये की ठगी की जांच जारी है।

पुलिस ने आरोपियों के पास से छह मोबाइल फोन, बैंक खाते की चेकबुक और डिजिटल साक्ष्य बरामद किए हैं।

अधिकारी ने बताया कि इसके अलावा सोशल मीडिया ऐप ‘टेलीग्राम’ पर ऐसे सात चैनलों की पहचान की गई है, जिनके जरिए कथित तौर पर बैंक खातों की खरीद-फरोख्त होती थी।

उनके मुताबिक, जांच में विभिन्न राज्यों की 78 साइबर अपराध शिकायतों से आरोपियों के संबंध सामने आए हैं, जिनमें कुल 73 करोड़ रुपये की राशि शामिल है। मामले में आगे की जांच जारी है।

भाषा नोमान नोमान नरेश

नरेश