नयी दिल्ली, 13 अक्टूबर (भाषा) सूक्ष्म, लघु और मझोले उद्यमों (एमएसएमई) को मुक्त व्यापार समझौतों और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में हो रहे बदलावों से उत्पन्न होने वाले अवसरों का लाभ उठाने के लिए उत्पादों की गुणवत्ता सुधारने, प्रौद्योगिकी को अपनाने और निर्यात क्षमता को मजबूत करने की जरूरत है।
एमएसएमई सचिव भरत खेड़ा ने मंगलवार को यहां ‘सीआईआई वैश्विक एमएसएमई शिखर सम्मेलन’ को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार इस क्षेत्र की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने के लिए व्यापक स्तर पर काम कर रही है। इसके तहत पांच प्रमुख क्षेत्रों - उद्यमों को औपचारिक व्यवस्था के दायरे में लाना, वित्त तक पहुंच, प्रौद्योगिकी अपनाना, निर्यात प्रतिस्पर्धा और उद्यमिता एवं कौशल विकास पर ध्यान दिया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं का स्वरूप बदल रहा है और प्रौद्योगिकी में भी बदलाव हो रहा है। ऐसे में उद्यमों को अधिक तेजी और मजबूती के साथ इन बदलावों के अनुरूप खुद को ढालना होगा।
खेड़ा ने कहा, ‘‘भारतीय एमएसएमई की प्रतिस्पर्धात्मकता मजबूत करना हमारी आर्थिक वृद्धि और 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य के लिए जरूरी है।’’
उन्होंने कहा कि वैश्विक बाजारों में भारतीय एमएसएमई की पहुंच बढ़ने के साथ यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि उनके उत्पाद और सेवाएं अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों पर खरे उतरें।
खेड़ा ने कहा, ‘‘हमें यह भी सुनिश्चित करना होगा कि प्रतिस्पर्धी कीमतें बनाए रखते हुए उत्पादों की गुणवत्ता एक जैसी रहे और उनकी आपूर्ति तय समय पर हो, ताकि अंतरराष्ट्रीय खरीदारों की अपेक्षाएं पूरी की जा सकें।’’
उन्होंने कहा, ‘‘देश में उत्पादों की जांच की बुनियादी सुविधाओं को बढ़ाना होगा। हमें यह भी सुनिश्चित करना होगा कि हम जिन उत्पादों का विनिर्माण कर रहे हैं और जो सेवाएं दे रहे हैं, वे वैश्विक बाजारों के अपेक्षित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप हों।’’
उन्होंने क्षेत्र में बदलाव को गति देने के लिए प्रौद्योगिकी अपनाने, कौशल एवं वित्त तक पहुंच बढ़ाने तथा सरकार और उद्योग के बीच साझेदारी मजबूत करने की जरूरत पर जोर दिया।
उद्यमों को औपचारिक व्यवस्था के दायरे में लाने के संबंध में खेड़ा ने कहा कि ‘उद्यम’ मंच पर 9.8 करोड़ उद्यम पंजीकृत हैं। उन्होंने ट्रेड रिसीवेबल्स डिस्काउंटिंग सिस्टम (ट्रेड्स) जैसी पहल के जरिये वित्त तक बेहतर पहुंच का भी उल्लेख किया।
शिखर सम्मेलन में दो रिपोर्ट ‘औपचारिकता से प्रतिस्पर्धा तक : सीआईआई-आईएसबी अखिल भारतीय एमएसएमई शोध, अक्टूबर 2026’ और ‘भारत के मुक्त व्यापार समझौते : वार्ता से बाजार पहुंच से व्यावसायिक लाभ तक’ जारी की गईं।
भाषा निहारिका अजय
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