आइजोल, 13 अक्टूबर (भाषा) केंद्रीय पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने मिजोरम विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों और ‘अष्टलक्ष्मी दर्शन’ कार्यक्रम (चरण-दो) में भाग ले रहे छात्रों से पारंपरिक करियर विकल्पों से आगे बढ़कर समस्या-समाधानकर्ता, नवोन्मेषक और समाज के प्रति जिम्मेदार योगदानकर्ता बनने का आह्वान किया।
एक आधिकारिक बयान के अनुसार, सिंधिया ने सोमवार को मिजोरम विश्वविद्यालय (एमजेडयू) में विद्यार्थियों से बातचीत के दौरान कहा कि करियर को केवल रोजगार हासिल करने के साधन के रूप में नहीं देखना चाहिए, बल्कि इसे समस्याओं की पहचान करने और ऐसे समाधान विकसित करने के अवसर के रूप में देखना चाहिए, जिनसे समुदायों और देश के लिए उपयोगी परिणाम मिल सकें।
विश्वविद्यालय के 25 वर्ष पूरे होने पर उसे बधाई देते हुए सिंधिया ने मिजोरम विश्वविद्यालय और पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास विभाग (डीओएनईआर) के बीच समानता का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि दोनों की स्थापना पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल में 2001 में हुई थी।
सिंधिया ने कहा कि विश्वविद्यालय अब 39 विभागों, अध्ययन के 10 स्कूलों और 39 संबद्ध महाविद्यालयों के साथ एक प्रमुख शिक्षण संस्थान बन गया है।
पूर्वोत्तर में बेहतर संपर्क सुविधाओं का उल्लेख करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इस क्षेत्र को अब भौगोलिक रूप से दूरस्थ क्षेत्र के बजाय अवसरों के केंद्र के रूप में देखा जा रहा है।
उन्होंने बैराबी-सैरांग रेल लाइन का उदाहरण दिया, जिसने स्वतंत्रता के बाद पहली बार मिजोरम को देश के रेल नेटवर्क से जोड़ा है।
सिंधिया ने कहा कि इस नयी रेल लाइन से यात्रियों और माल की आवाजाही बढ़ने से क्षेत्र का देश के बाकी हिस्सों के साथ आर्थिक और सांस्कृतिक एकीकरण मजबूत होगा।
केंद्रीय मंत्री ने पूर्वोत्तर के प्रत्येक राज्य के विशिष्ट उत्पादों को विकसित करने की आवश्यकता पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि इसके लिए उत्पादन और प्रसंस्करण से लेकर ब्रांडिंग तथा विपणन तक की पूरी मूल्य शृंखला को मजबूत करना होगा।
उन्होंने कहा कि मिजोरम के प्रमुख कृषि उत्पाद के रूप में मिजो अदरक की पहचान की गई है, ताकि किसानों की बाजार तक पहुंच बढ़ाई जा सके और राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय बाजारों में इसे बढ़ावा दिया जा सके।
सिंधिया ने पूर्वोत्तर को भारत का उभरता विकास इंजन बताते हुए कहा कि इस क्षेत्र के आठों राज्यों में पर्याप्त आर्थिक क्षमता है और वे देश के विकास संबंधी लक्ष्यों को आगे बढ़ाने में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।
उन्होंने विद्यार्थियों से मिजोरम की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित रखने का भी आग्रह किया।
केंद्रीय मंत्री ने विशेष रूप से मिजो समुदाय के पारंपरिक मूल्य ‘त्लावमंगाइह्ना’ का उल्लेख किया, जो नि:स्वार्थता, साहस, आतिथ्य, सेवा और समुदाय के प्रति जिम्मेदारी की भावना को दर्शाता है।
उन्होंने कहा कि इन मूल्यों का महत्व मिजोरम से परे भी है और ये पूरी मानवता के लिए मार्गदर्शक सिद्धांत बन सकते हैं।
सिंधिया ने विद्यार्थियों से जिम्मेदार नेतृत्वकर्ता और नवोन्मेषक बनने तथा 2047 तक विकसित भारत के निर्माण की यात्रा में योगदान देने का आह्वान किया।
भाषा रवि कांत सुरेश
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