Breaking News

यूपी-बिहार, कर्नाटक, महाराष्ट्र में आज आएंगे MLC चुनाव के नतीजे     |   इजरायल में आम चुनाव आज, होगी वोटिंग     |   गुवाहाटी के होटल में हुई फायरिंग में इस्तेमाल हथियार जब्त, 5 की मौत     |   चक्रवात 'ऑर्नब' को लेकर आंध्र प्रदेश में अलर्ट, भारी बारिश की आशंका     |   यूक्रेन की राजधानी कीव में जबरदस्त धमाका, कल रूस ने भी किया था अटैक     |  

सीएमआरएल रिश्वतखोरी प्रकरण में ईडी रिपोर्ट के बाद प्रारंभिक जांच क्यों: न्यायालय

कोच्चि, 13 अक्टूबर (भाषा) केरल उच्च न्यायालय ने मंगलवार को राज्य सरकार से सवाल किया कि जब प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने कथित सीएमआरएल रिश्वत मामले में पूर्व मुख्यमंत्री पिनराई विजयन और अन्य लोगों के खिलाफ ‘भ्रष्टाचार रोकथाम अधिनियम' के तहत अपराधों की जानकारी दी थी तो उसने आरंभिक जांच का आदेश क्यों दिया?

न्यायमूर्ति के नटराजन और न्यायमूर्ति जॉनसन जॉन की खंडपीठ ने यह सवाल तब पूछा, जब वह विजयन, उनकी बेटी वीना टी और उनके पति पी. ए. मोहम्मद रियास की अर्जियों पर सुनवाई कर रही थी।

याचिकाकर्ताओं ने सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (वीएसीबी) को उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश देने वाले एकल न्यायाधीश के आदेश के खिलाफ अपील करने की इजाजत मांगी थी।

महाधिवक्ता जाजू बाबू ने खंडपीठ को बताया कि सरकार ने आरंभिक जांच का आदेश देने का फैसला इसलिए किया क्योंकि वह निदेशालय से मिली जानकारी में लगाए गए आरोपों की पुष्टि करना चाहती थी, क्योंकि ईडी ने इस मामले से जुड़ी कई अन्य सामग्रियां केरल पुलिस को नहीं सौंपी थीं।

विजयन, वीना और रियास ने अपनी अपील में कहा है कि एकल न्यायाधीश ने नौ अक्टूबर को प्राथमिकी दर्ज का आदेश देने से पूर्व उनकी बात नहीं सुनी थी।

दो घंटे से ज़्यादा चली सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने अपीलकर्ताओं से पूछा कि जब प्राथमिकी पहले ही दर्ज हो चुकी थी तो उन्होंने उसे चुनौती क्यों नहीं दी।

खंडपीठ ने यह भी पूछा कि क्या किसी आपराधिक मामले में आरोपी या संभावित आरोपी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने से पहले हमेशा उनकी बात सुनी जानी चाहिए।

अपीलकर्ताओं के वकीलों ने तर्क दिया कि उन्हें सुना जाना चाहिए था क्योंकि न्यायालय एक रिट याचिका पर सुनवाई कर रहा था और उसके आदेशों का उन पर असर पड़ता।

अपीलकर्ताओं के वकीलों ने कहा, ‘‘यह मामला ऐसा नहीं था जिसमें कोई पुलिस अधिकारी सामान्य प्रक्रिया के तहत प्राथमिकी दर्ज कर रहा हो।’’

उन्होंने यह भी कहा कि एक बार जब उच्च न्यायालय ने प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दे दिया है तो अपीलकर्ता इसे अदालत में चुनौती नहीं दे सकते।

उन्होंने यह भी दावा किया कि जिस याचिका पर एकल न्यायाधीश ने आदेश दिया था, वह जनहित याचिका के रूप में थी और इसलिए, उस पर जनहित याचिकाओं से संबंधित मामलों को देखने वाली खंडपीठ को सुनवाई करनी चाहिए थी।

ईडी ने आरोप लगाया है कि सीएमआरएल ने आईटी कंसल्टेंसी सेवाओं के नाम पर वीणा की अब बंद हो चुकी कंपनी, 'एक्सलॉजिक सॉल्यूशंस' को धोखाधड़ी के तहत 2.78 करोड़ रुपये का भुगतान किया।

भाषा

राजकुमार नरेश

नरेश