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योगी सरकार बनाएगी ₹104 करोड़ का साइबर सिक्योरिटी सेंटर, 24 घंटे होगी सरकारी सिस्टम की निगरानी

उत्तर प्रदेश में सरकारी डिजिटल सिस्टम को साइबर हमलों से सुरक्षित बनाने के लिए योगी सरकार बड़ा कदम उठाने जा रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में उत्तर प्रदेश साइबर सिक्योरिटी ऑपरेशन्स सेंटर (UP-CSOC) स्थापित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। इस परियोजना पर जीएसटी सहित करीब 104.28 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।

इस केंद्र की स्थापना आईआईटी कानपुर के साइबर सिक्योरिटी इनोवेशन हब C3iHub के माध्यम से कराई जाएगी। यहां प्रदेश के सरकारी डिजिटल सिस्टम की 24 घंटे निगरानी होगी, ताकि साइबर हमलों और डेटा चोरी जैसे खतरों की समय रहते पहचान कर कार्रवाई की जा सके।

सरकारी डिजिटल सिस्टम पर रहेगी नजर

वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना के अनुसार, इस केंद्र के जरिए स्टेट डेटा सेंटर, उत्तर प्रदेश स्टेट वाइड एरिया नेटवर्क (UPSWAN), सरकारी एप्लिकेशन और अन्य महत्वपूर्ण डिजिटल प्रणालियों की निगरानी की जाएगी।

किसी संदिग्ध गतिविधि, साइबर हमले या डेटा में सेंधमारी की आशंका होने पर केंद्र से त्वरित कार्रवाई करने में मदद मिलेगी। इससे अलग-अलग सरकारी विभागों की साइबर सुरक्षा व्यवस्था को एकीकृत और व्यवस्थित बनाया जा सकेगा।

तीन साल तक संचालन करेगा C3iHub

UP-CSOC की स्थापना और संचालन के लिए आईआईटी कानपुर के C3iHub को कार्यान्वयन एजेंसी के रूप में जिम्मेदारी देने का प्रस्ताव है। एजेंसी केंद्र की स्थापना के बाद तीन साल तक इसका संचालन, निगरानी, रखरखाव और तकनीकी सहायता उपलब्ध कराएगी।

इस दौरान साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ संदिग्ध गतिविधियों का विश्लेषण करेंगे और संभावित खतरों से निपटने के लिए जरूरी कदम उठाएंगे। विभिन्न सरकारी विभागों के मुख्य सूचना सुरक्षा अधिकारियों और नोडल अधिकारियों के साथ भी समन्वय किया जाएगा।

AI और आधुनिक तकनीक से पकड़े जाएंगे साइबर खतरे

साइबर सिक्योरिटी सेंटर में कई आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया जाएगा। इनमें नेक्स्ट जनरेशन फायरवॉल, सिक्योरिटी इन्फॉर्मेशन एंड इवेंट मैनेजमेंट, नेटवर्क डिटेक्शन एंड रिस्पॉन्स और वेब एप्लिकेशन फायरवॉल जैसी प्रणालियां शामिल हैं।

इसके अलावा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), मशीन लर्निंग (ML) और थ्रेट इंटेलिजेंस की मदद से साइबर खतरों की पहचान और उनका विश्लेषण किया जाएगा। इससे रैनसमवेयर, डेटा चोरी और बिना अनुमति डिजिटल सिस्टम तक पहुंच बनाने जैसी गतिविधियों से निपटने में सहायता मिलेगी।

साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण और ऑडिट भी होगा

परियोजना के तहत साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों की चौबीसों घंटे तैनाती की जाएगी। साथ ही, सरकारी विभागों की तैयारी मजबूत करने के लिए साइबर ड्रिल, प्रशिक्षण, थ्रेट हंटिंग और सिस्टम की कमजोरियों का आकलन किया जाएगा।

केंद्र की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा के लिए स्वतंत्र थर्ड-पार्टी सिक्योरिटी ऑडिटर भी नियुक्त किया जाएगा। इसके माध्यम से हर तिमाही सुरक्षा ऑडिट और तय मानकों के अनुपालन की जांच होगी। योगी सरकार की इस पहल का उद्देश्य सरकारी डिजिटल सेवाओं की सुरक्षा मजबूत करना और साइबर हमलों से होने वाले संभावित नुकसान को कम करना है।