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एसआईआर पर सुनवाई के लिए 19 न्यायाधिकरणों में से तीन के पद रिक्त

नयी दिल्ली, 11 अक्टूबर (भाषा) पश्चिम बंगाल में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) से जुड़े विवादों के निपटारे के लिए गठित 19 अपीलीय न्यायाधिकरणों में से कम से कम तीन के प्रमुखों के पद खाली पड़े हैं, जबकि बड़ी संख्या में अपील लंबित हैं। निर्वाचन आयोग इन पदों पर नियुक्ति के लिए कलकत्ता उच्च न्यायालय से नाम मिलने का इंतजार कर रहा है।

निर्वाचन आयोग के अधिकारियों ने बताया कि ‘‘कम से कम’’ तीन न्यायाधिकरणों में प्रमुख नहीं हैं।

कलकत्ता उच्च न्यायालय सेवानिवृत्त न्यायाधीशों के नाम पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को भेजेगा जिसके बाद इन तीन न्यायाधिकरणों में उनकी नियुक्ति की अधिसूचना जारी की जाएगी।

ये न्यायाधिकरण कलकत्ता उच्च न्यायालय के अधीन काम करते हैं, जबकि निर्वाचन आयोग उन्हें कर्मचारियों और ऑनलाइन सुनवाई के लिए डिजिटल मंच सहित सचिवालय संबंधी सहायता उपलब्ध कराता है।

स्थानीय और नगर निकाय चुनाव नजदीक होने के साथ ही, 37 लाख से ज़्यादा मतदाता कानूनी अनिश्चितता की स्थिति में हैं, जिससे बड़ी संख्या में लोगों के वोट देने का अधिकार छिनने की आशंका को लेकर व्यापक चिंताएं पैदा हो गई हैं।

उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के बाद 21 मार्च को गठित इन विशेष न्यायाधिकरणों को एसआईआर प्रक्रिया के दौरान लाखों नाम मतदाता सूची से हटाए जाने या उन पर आपत्ति जताए जाने के बाद उत्पन्न विवादों का निपटारा करने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।

हालांकि, उच्चतम न्यायालय में दी गई दलीलों के मुताबिक, इस व्यवस्था में कुछ खामियां हैं।

कुल 38.3 लाख अपील में से 22.2 लाख मतदाताओं ने सूची से अपना नाम हटाए जाने को चुनौती दी, जबकि 16.1 लाख अपील मतदाता सूची में नाम शामिल किए जाने के खिलाफ दायर की गईं।

न्यायाधिकरण अब तक केवल करीब 1.02 लाख मामलों का ही निपटारा कर पाए हैं। इस तरह मामलों के निपटारे की दर तीन प्रतिशत से भी कम है। याचिकाकर्ताओं ने उच्चतम न्यायालय से कहा कि मौजूदा रफ्तार से लंबित मामलों का निपटारा करने में 12 साल से अधिक समय लग सकता है।

भाषा आशीष नेत्रपाल

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