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विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए एसएलआर में कटौती जरूरी: अमिताभ कांत

मुंबई, 11 अक्टूबर (भाषा) नीति आयोग के पूर्व मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) अमिताभ कांत ने कहा कि भारत को रोजगार के अधिक अवसर पैदा करने वाले विनिर्माण क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए वैधानिक तरलता अनुपात (एसएलआर) में कटौती करनी चाहिए।

कांत ने कहा कि उत्पादन से जुड़े प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना विनिर्माण क्षेत्र के लिए अल्पकालिक समाधान है, लेकिन लंबी अवधि में कारोबार की लागत घटाने के लिए एसएलआर में कटौती जैसे कदम उठाने की जरूरत है। इससे कर्ज की लागत कम हो सकती है।

उन्होंने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘भारत के लिए 18 प्रतिशत का वैधानिक तरलता अनुपात बहुत अधिक है। मैं इसे कम करने का बड़ा समर्थक हूं, क्योंकि लंबी अवधि में विनिर्माण क्षेत्र को कर्ज की उपलब्धता बढ़ाना अहम होगा।’’

एसएलआर का उचित स्तर बताए बिना पूर्व नौकरशाह ने कहा कि विनिर्माण क्षेत्र की वृद्धि के लिए कर्ज की लागत घटाना और वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता बढ़ाना जरूरी होगा। एसएलआर के तहत बैंकों को अपनी शुद्ध मांग और देनदारियों यानी जमा का एक अनिवार्य हिस्सा सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश करना होता है।

एसएलआर को कुछ साल पहले घटाकर 18 प्रतिशत किया गया था और तब से यह इसी स्तर पर बना हुआ है। इससे सरकार को उधारी जुटाने में मदद मिलती है, लेकिन इसकी आलोचना इस आधार पर भी होती है कि इससे निजी क्षेत्र की कंपनियों के लिए उपलब्ध पूंजी कम हो जाती है।

उन्होंने कहा कि विनिर्माण क्षेत्र रोजगार के अवसर पैदा करता है, जो भारत जैसे देश के लिए महत्वपूर्ण है। इसके साथ ही उन्होंने भूमि अधिग्रहण को भी अहम बताया।

कांत ने कहा, ‘‘हमें यह देखना चाहिए कि चीन और उसके साथ प्रतिस्पर्धा करने वाले वियतनाम तथा मेक्सिको जैसे देश आसान भूमि अधिग्रहण या लंबी अवधि के लिए जमीन पट्टे पर देने के जरिये अपने विनिर्माण क्षेत्र को किस तरह समर्थन दे रहे हैं।’’

उन्होंने कहा कि बिजली की लागत और उसकी उपलब्धता पर भी ध्यान देने की जरूरत है। बिजली राज्य का विषय है, इसलिए राज्यों को इस पर विचार करना चाहिए।

भाषा

योगेश पाण्डेय

पाण्डेय