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जयपुर के बीचोंबीच ‘जंगल का रोमांच’, तेंदुओं की मौजदूगी ने झालाना-आमागढ़ को बनाया आकर्षण का केंद्र

जयपुर, 11 अक्टूबर (भाषा) जयपुर शहर के बीचोंबीच स्थित जंगल में तेंदुओं को देखने का रोमांच, अरावली की पहाड़ियों के प्राकृतिक नजारे और कम समय में वन्यजीवों के बीच पहुंचने का अवसर—ये खूबियां झालाना व आमागढ़ तेंदुआ सफारी को पर्यटकों के बीच खासा लोकप्रिय बना रही हैं और यही वजह है कि करीब आठ वर्षों में पर्यटकों की संख्या लगभग तीन गुना बढ़ोतरी हुई है।

वन विभाग के अनुसार, झालाना में 32 से अधिक और आमागढ़ में 15 से अधिक तेंदुए मौजूद हैं। दोनों वन क्षेत्रों में तेंदुओं को देखने की अच्छी संभावना पर्यटकों के आकर्षण का प्रमुख कारण है।

झालाना में मादा तेंदुआ ‘फ्लोरा’ और उसके शावकों को भी पर्यटक आसानी से देख पा रहे हैं।

सहायक वन संरक्षक जितेन्द्र सिंह शेखावत ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि जयपुर शहर के बीचोंबीच स्थित इन वन क्षेत्रों की खासियत यह है कि पर्यटकों को शहर से दूर जाए बिना जंगल में भ्रमण का अनुभव मिल जाता है।

उन्होंने कहा, ‘‘तेंदुओं के अलावा अन्य वन्यजीवों और पक्षियों की मौजूदगी भी इन सफारियों को आकर्षक बनाती है।’’

शेखावत ने कहा, ‘‘करीब 20 वर्ग किलोमीटर में फैले झालाना वन क्षेत्र में अरावली की पहाड़ियों, झाड़ियों और खुले इलाकों के बीच तेंदुओं को आसानी से देखा जा सकता है।’’

वन विभाग के अनुसार, झालाना में लकड़बग्घा, नीलगाय, चीतल, सांभर, सियार, लोमड़ी, जंगली बिल्ली, साही और गोह सहित कई अन्य वन्यजीव भी पाए जाते हैं। यहां पक्षियों की 132, स्तनधारियों की 33 और सरीसृपों की 20 प्रजातियां दर्ज की गई हैं।

इसने बताया कि 2017-18 में यहां 15,479 पर्यटक पहुंचे थे, जबकि 2025-26 में यह संख्या बढ़कर 46,519 हो गई यानी करीब आठ वर्षों में पर्यटकों की संख्या लगभग तीन गुना हो गई।

इसी अवधि में सफारी से होने वाली आय भी करीब 17.23 लाख रुपये से बढ़कर 4.24 करोड़ रुपये हो गई। वर्ष 2025-26 में पर्यटकों की संख्या उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार अब तक के सर्वोच्च स्तर पर पहुंच गई।

वर्ष 2018-19 में झालाना पहुंचे पर्यटकों की संख्या 27,575 और 2019-20 में 26,185 रही। कोरोना महामारी के दौरान 2020-21 में यह घटकर 21,505 रह गई थी, लेकिन इसके बाद पर्यटकों की संख्या में फिर वृद्धि होने लगी।

वन विभाग के अनुसार 2021-22 में 34,796, 2022-23 में 39,463, 2023-24 में 44,557 और 2024-25 में 42,348 पर्यटकों ने सफारी की।

इसने बताया कि 2026-27 में अगस्त तक 18,364 पर्यटक झालाना सफारी कर चुके हैं और इस दौरान 1,71,44,521 रुपये की आय हुई। अकेले अगस्त में 4,008 पर्यटकों ने सफारी की और इससे 37,82,259 रुपये की आय दर्ज की गई।

मई 2022 में शुरू हुई आमागढ़ तेंदुआ सफारी में भी पर्यटकों की संख्या लगातार बढ़ी है। वित्त वर्ष 2022-23 में यहां 8,517 पर्यटक पहुंचे थे, जबकि 2025-26 में यह संख्या बढ़कर 16,248 हो गई। इस अवधि में सफारी से होने वाली आय 62,80,605 रुपये से बढ़कर 1,45,39,545 रुपये पहुंच गई।

आमागढ़ में 2023-24 में 12,373 और 2024-25 में 13,331 पर्यटकों ने सफारी की। चालू वित्त वर्ष 2026-27 में अगस्त तक 2,454 पर्यटक यहां पहुंच चुके हैं और इससे 21,84,868 रुपये की आय हुई है।

अधिकारियों के अनुसार, आमागढ़-झालाना संरक्षण क्षेत्र करीब 3,507 हेक्टेयर में फैला है। आमागढ़ में अरावली की पहाड़ियों, घाटियों और प्राकृतिक वन क्षेत्र के साथ तेंदुओं की मौजूदगी पर्यटकों को आकर्षित करती है। सफारी मार्ग के विकास और विस्तार के बाद यहां से जलमहल का दृश्य भी पर्यटकों के लिए अतिरिक्त आकर्षण बन सकता है।

झालाना सफारी में अभिनेता संजय दत्त, रितेश देशमुख, अक्षय कुमार, रणदीप हुड्डा, रवीना टंडन, जेनेलिया डिसूजा और फराह खान के अलावा क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर तथा सूर्यकुमार यादव सहित कई जानी-मानी हस्तियां भी सफारी कर चुकी हैं।

अधिकारियों के अनुसार, जयपुर शहर से कम दूरी पर प्राकृतिक जंगल का अनुभव, अरावली की पहाड़ियों का मनमोहक दृश्य और तेंदुओं को देखने की संभावना झालाना तथा आमागढ़ सफारी की प्रमुख विशेषताएं हैं।

भाषा बाकोलिया खारी

खारी