अमरावती, 10 अक्टूबर (भाषा) आंध्र प्रदेश मंत्रिमंडल ने शनिवार को राजीव रंजन आयोग की रिपोर्ट के आधार पर स्थानीय निकाय चुनावों में पिछड़ा वर्ग (बीसी) के लिए आरक्षण को अंतिम रूप दे दिया।
मंत्रिमंडल की बैठक के बाद सचिवालय में संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए, कृषि मंत्री के. अत्चन्नायडू ने कहा कि बीसी को ग्राम पंचायत वार्ड सदस्य के पदों पर 26.73 प्रतिशत आरक्षण मिलेगा।
मंत्री ने कहा, ‘‘गठबंधन सरकार का मुख्य लक्ष्य सामाजिक न्याय करना और बीसी को उचित राजनीतिक प्रतिनिधित्व देना है।’’
इसके अलावा, उन्होंने कहा कि पिछड़ा वर्ग को ग्राम पंचायत सरपंच पदों पर 27.95 प्रतिशत, मंडल परिषद प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्रों (एमपीटीसी) में 25.55 प्रतिशत तथा मंडल परिषद अध्यक्षों और जिला परिषद प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्रों (जेडपीटीसी) में प्रत्येक जगह 24.6 प्रतिशत आरक्षण मिलेगा।
उन्होंने बताया कि जिला परिषद अध्यक्ष पदों के लिए पिछड़ा वर्ग आरक्षण 23.08 प्रतिशत, शहरी स्थानीय निकाय वार्ड सदस्य पदों के लिए 32.78 प्रतिशत, नगरपालिका अध्यक्ष पदों के लिए 33.02 प्रतिशत और महापौर पदों के लिए 35.29 प्रतिशत होगा।
तेदेपा नीत सरकार का यह फैसला उच्चतम न्यायालय द्वारा स्थानीय निकायों में पिछड़ा वर्ग के लिए 34 प्रतिशत आरक्षण बढ़ाने के उसके पिछले फैसले को खारिज किए जाने के एक दिन बाद आया है।
इस बीच, राज्य के स्वास्थ्य मंत्री सत्य कुमार यादव ने वाईएसआरसीपी प्रमुख वाई. एस. जगन मोहन रेड्डी पर पिछड़ा वर्ग के आरक्षण को 34 प्रतिशत से घटाकर 24 प्रतिशत करने का आरोप लगाया।
यादव ने कहा, ‘‘ऐसे समय में जब मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू पिछड़ा वर्ग को सशक्त बनाने के लिए प्रयासरत हैं, वाईएसआरसीपी उन प्रयासों में बाधा डालने और स्थानीय निकाय चुनावों में देरी करने की साजिश रच रही है।’’
मंत्री ने कहा कि चुनाव कराने में किसी भी तरह की देरी से 16वें वित्त आयोग के कोष के प्रवाह पर असर पड़ेगा।
भाषा
दिलीप अविनाश
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