चंडीगढ़, 10 अक्टूबर (भाषा) हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने शनिवार को आरोप लगाया कि राज्य की अनाज मंडियों में अब तक पहुंचे 12 लाख टन धान में से केवल 30 प्रतिशत की खरीद हुई है।
हुड्डा ने कहा कि प्रशासनिक अड़चनों के कारण किसानों को अपनी उपज न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से कम कीमत पर बेचने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
उन्होंने ने उकलाना अनाज मंडी का उदाहरण देते हुए कहा कि सरकारी एजेंसी के पास धान में नमी की मात्रा जांचने वाली तीन मशीन से एक ही नमूने की जांच की गई, लेकिन तीनों मशीन ने अलग-अलग रीडिंग दी।
उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसी विसंगतियों का उपयोग किसानों को एमएसपी देने से इनकार करने के लिए किया जा रहा है।
उन्होंने दावा किया कि मंडियों में पहुंचे 12 लाख टन धान में से केवल 30 प्रतिशत की खरीद हुई है, जबकि 70 प्रतिशत धान की खरीद अभी बाकी है।
इसके अलावा, खरीदे गए धान में से केवल 17 प्रतिशत का ही उठान हुआ है। इससे मंडियों में नयी फसल रखने के लिए जगह की कमी हो रही है।
हुड्डा ने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार धान की खरीद नहीं करना चाहती और किसानों को पोर्टल संबंधी समस्याओं, सत्यापन, गेट पास, सीमा निर्धारण तथा खरीद की तय सीमा जैसी प्रशासनिक प्रक्रियाओं में उलझा रही है।
उन्होंने कहा कि राज्य की कई अनाज मंडियों के दौरे के दौरान किसानों ने उन्हें बताया कि सरकारी खरीद नहीं होने के कारण वे अपनी उपज एमएसपी से कम कीमत पर बेचने को मजबूर हैं।
हुड्डा के अनुसार, किसान धान एमएसपी से 400 रुपये प्रति क्विंटल तक कम कीमत पर बेच रहे हैं। वहीं, बाजरे की बिक्री भी निर्धारित मूल्य से 800 से 900 रुपये प्रति क्विंटल कम पर हो रही है।
उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव के दौरान मुख्यमंत्री ने धान की खरीद 3,100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से करने की घोषणा की थी, लेकिन किसानों को 2,441 रुपये प्रति क्विंटल का एमएसपी भी नहीं मिल रहा है।
हुड्डा ने कहा कि मूंग का एमएसपी 8,780 रुपये प्रति क्विंटल है, लेकिन सरकारी खरीद नहीं होने से किसानों को प्रति क्विंटल 1,500 से 1,600 रुपये तक का नुकसान हो रहा है। इसी तरह, बाजरा किसानों को भी करीब 900 रुपये प्रति क्विंटल का नुकसान उठाना पड़ रहा है। उनके मुताबिक, किसानों को बाजरा 2,000 रुपये प्रति क्विंटल तक की कीमत पर बेचना पड़ रहा है।
भाषा यासिर रंजन
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