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देवघर (झारखंड), 10 अक्टूबर (भाषा) उपराष्ट्रपति सी पी राधाकृष्णन ने शनिवार को कहा कि ‘विकसित भारत’ का सपना तभी साकार हो सकता है, जब सभी राज्यों, जिलों और छोटे-छोटे गांवों का भी एक साथ विकास हो।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, कौशल विकास, प्रौद्योगिकी और उद्यमिता में सही निवेश के जरिए झारखंड समावेशी और सतत विकास का एक सशक्त केंद्र बन सकता है।
राधाकृष्णन ने देवघर स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के दूसरे दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का 2047 तक विकसित भारत बनाने का दृष्टिकोण है। यह तभी साकार हो सकता है, जब हर राज्य, जिले और छोटे गांव का एक साथ विकास हो। आदिवासी समुदायों और ग्रामीण आबादी को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं तथा उच्च शिक्षा तक पहुंच उपलब्ध कराना इस मिशन का मुख्य हिस्सा है।’’
उन्होंने कहा कि प्रत्येक नागरिक को सर्वोत्तम स्वास्थ्य सेवाएं मिलना उसका मौलिक अधिकार है।
राधाकृष्णन ने कहा, ‘‘पिछले एक दशक में देश में चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य ढांचे का अभूतपूर्व विस्तार हुआ है। नए एम्स और मेडिकल कॉलेज स्थापित किए गए हैं, एमबीबीएस और स्नातकोत्तर की सीटों में तेजी से वृद्धि हुई है और आयुष्मान भारत जैसी प्रमुख योजनाओं के जरिए सबसे गरीब परिवारों को भी स्वास्थ्य बीमा का लाभ मिला है।’’
उपराष्ट्रपति ने कहा कि पहले देश में केवल एक एम्स था, लेकिन अब इनकी संख्या बढ़कर 12 हो गई है और आने वाले समय में और एम्स स्थापित किए जाएंगे।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कार्यभार संभालने के समय 2014 में देश में 387 मेडिकल कॉलेज थे, जिनकी संख्या अब दोगुने से अधिक बढ़कर 846 हो गई है।
राधाकृष्णन ने कहा कि इसी अवधि में एमबीबीएस की सीटों की संख्या 5,100 से बढ़कर 1.39 लाख हो गई, जबकि स्नातकोत्तर (पीजी) सीटों की संख्या 31,000 से बढ़कर लगभग 86,000 हो गई।
इस अवसर पर संस्थान ने 50 एमबीबीएस, 94 बीएससी, 12 एमएससी और आठ डॉक्टर ऑफ मेडिसिन (एमडी) एवं मास्टर ऑफ सर्जरी (एमएस) के विद्यार्थियों को डिग्रियां प्रदान कीं।
एक आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, बाद में उपराष्ट्रपति ने देवघर में ‘सैन्य संपर्क मेला– सदैव आपके साथ’ का दौरा किया। भारतीय सेना ने देवघर जिला प्रशासन के सहयोग से इस मेले का आयोजन किया था। इसका उद्देश्य संथाल परगना क्षेत्र के पूर्व सैनिकों, वीर नारियों और उनके आश्रितों को कल्याणकारी सेवाएं तथा शिकायतों के निवारण की सुविधा उपलब्ध कराना था।
भाषा आशीष सुभाष
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