जयपुर, 10 अक्टूबर (भाषा) राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने शनिवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और केंद्र सरकार पर विदेशी ताकतों के सामने पूरी तरह ‘घुटने टेकने’ का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा कि भाजपा निर्वाचन आयोग पर सवाल उठाने के लिए विपक्ष को बदनाम करने की कोशिश कर रही है।
गहलोत ने कहा कि लोकतंत्र में सवाल पूछना और विरोध करना विपक्ष का अधिकार है, कोई अपराध नहीं। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा अपने रवैये से बेनकाब हो चुकी है।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक बयान के जरिये भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वह विपक्ष के सवालों का जवाब देने के बजाय निर्वाचन आयोग के वकील की तरह काम कर रहे हैं।
उन्होंने कहा, “सवालों से डरी भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन को अब निर्वाचन आयोग का वकील बनना पड़ रहा है।”
गहलोत ने कहा, “हम पहले से कहते आ रहे हैं कि भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) लोकतंत्र में विश्वास नहीं करते और आज इन्होंने खुद यह साबित कर दिया।”
भाजपा पर कटाक्ष करते हुए उन्होंने कहा, “विपक्ष का आंदोलन इनके लिए ‘देश को अस्थिर करने की साजिश’ हो गया, जबकि विपक्ष में रहते हुए भाजपा खुद सड़कों पर उतरती थी। तब कौन-सी विदेशी ताकत थी और आज कौन-सी है?”
उन्होंने भाजपा और आरएसएस पर निशाना साधते हुए कहा, “जिन्होंने आजादी की लड़ाई में उंगली तक नहीं कटाई, वे आज लोकतंत्र की आवाज उठाने वालों को देश-विरोधी साबित करने निकले हैं। इनकी जितनी निंदा की जाए, कम है।”
गहलोत ने कहा कि राहुल गांधी ने कन्याकुमारी से कश्मीर तक भारत जोड़ो यात्रा निकाली थी।
उन्होंने कहा, “जो व्यक्ति देश को जोड़ने की बात कर रहा है, आप उसी पर उंगली उठा रहे हैं। यह बेहद शर्मनाक है।”
उन्होंने कहा, “देश ने शायद ही कभी देखा हो कि सत्ताधारी पार्टी खुद ही लोकतांत्रिक विरोध को बदनाम करके देश में तनाव बढ़ाने का काम करे।”
गहलोत ने दावा किया कि दिल्ली को छावनी में तब्दील कर दिया गया है।
उन्होंने कहा, “75 ट्रेनें रद्द हैं, 57 मेट्रो स्टेशनों के गेट बंद हैं, नयी दिल्ली के बड़े हिस्से में इंटरनेट बंद है और स्कूलों की परीक्षाएं तक रद्द करनी पड़ी हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह देश के सामने आकर जवाब देने से बच रहे हैं।”
उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष पर विदेशी ताकतों के प्रभाव में काम करने का आरोप लगाने वाली भाजपा और केंद्र सरकार खुद विदेशी ताकतों के सामने घुटने टेक चुकी हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयानों तथा भारत पर लगाए जा रहे शुल्क और वीजा नीतियों से यह बार-बार दिखाई देता है।
बाद में संवाददाताओं से बात करते हुए गहलोत ने विरोध प्रदर्शन करने वालों से सख्ती से निपटने संबंधी नितिन नवीन की टिप्पणी पर सवाल उठाए।
उन्होंने कहा, “नितिन नवीन को यह भी बताना चाहिए कि आंदोलनकारियों से शक्ति के इस्तेमाल के जरिए निपटने की बात का आखिर क्या अर्थ है और उन्हें ऐसी भाषा का इस्तेमाल करने का अधिकार किसने दिया है। भाजपा एक राजनीतिक दल है और उसे राजनीतिक मुद्दों का जवाब राजनीतिक तरीके से देना चाहिए।”
गहलोत ने भाजपा अध्यक्ष के आरोपों पर पलटवार करते हुए कहा कि विपक्ष पर विदेशी ताकतों के प्रभाव में काम करने का आरोप लगाने से पहले भाजपा को अपने आचरण पर भी विचार करना चाहिए। उन्होंने नवीन द्वारा इस्तेमाल की गई भाषा की कड़ी निंदा की।
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के निर्देश के बिना नवीन ऐसी टिप्पणी नहीं कर सकते थे।
उन्होंने कहा, “अगर कोई राष्ट्रीय पार्टी और सत्ताधारी दल का अध्यक्ष यह कहता है कि हम सख्ती से निपटेंगे, तो वह सरकार के गृह मंत्री अमित शाह के इशारे के बिना ऐसा नहीं बोल सकता। अगर भाजपा अध्यक्ष मंत्री या गृह मंत्री जैसी भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं, तो इसका मतलब है कि सरकार की ओर से उन्हें प्रेस वार्ता में इसी भाषा में बात करने का निर्देश मिला है।”
गहलोत ने कहा कि जब भाजपा विपक्ष में थी, तब उसने भी सड़कों पर विरोध प्रदर्शन किए थे, लेकिन कांग्रेस ने कभी उस पर विदेशी ताकतों के इशारे पर काम करने का आरोप नहीं लगाया।
कांग्रेस नेता ने कहा, “हमने हमेशा विपक्ष का सम्मान किया। लेकिन भाजपा, आरएसएस और निर्वाचन आयोग के रवैये को देखिए।”
राहुल गांधी पर भाजपा के आरोपों के जवाब में गहलोत ने भारत जोड़ो यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि देश को जोड़ने की बात करने वाले नेता पर उंगली उठाना शर्मनाक है।
उन्होंने कहा कि भाजपा और आरएसएस की विचारधारा को लेकर कांग्रेस की शिकायत रही है कि वे लोकतंत्र में विश्वास नहीं करते।
गहलोत ने कहा कि लोकतंत्र का मुखौटा पहनकर चुनाव जीतना और धर्म के नाम पर सत्ता हासिल करना लोकतांत्रिक मूल्यों में वास्तविक आस्था होने का प्रमाण नहीं है।
भाषा
पृथ्वी रवि कांत