चेन्नई, 10 अक्टूबर (भाषा) कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर तमिलनाडु की संस्कृति, भाषा तथा इतिहास पर हमला करने का आरोप लगाया और दावा किया कि परिसीमन के जरिए तमिलनाडु को 'दंडित करने' एवं संसद में उसकी आवाज दबाने की कोशिश की जा रही है।
उन्होंने चेन्नई के 'आइलैंड ग्राउंड' में 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम में यह भी कहा कि तमिलनाडु के लोगों को परिसीमन के मुद्दे पर सतर्क रहने की जरूरत है।
उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार की नीतियां राज्य के अधिकारों और उसकी सांस्कृतिक पहचान को कमजोर करने वाली हैं।
राहुल गांधी ने कहा, ''परिसीमन तमिलनाडु को दंडित करने और राष्ट्रीय संसद में उसकी आवाज दबाने के लिए तैयार किया गया है।''
राहुल गांधी ने तमिलनाडु में परिसीमन का मुद्दा एक बार फिर से उठाया, जब पिछले कुछ सप्ताह से ऐसी चर्चा है कि सरकार महिला आरक्षण और परिसीमन से संबंधित संविधान संशोधन विधेयक एक बार फिर पेश कर सकती है। इस साल 17 अप्रैल को लोकसभा में दो तिहाई बहुमत नहीं होने के कारण सरकार इस विधेयक को पारित कराने में नाकाम रही थी।
उल्लेखनीय है कि संसद के पिछले मानसून सत्र का अभी तक सत्रावसान नहीं हुआ है, जो बीते 13 अगस्त को संपन्न हुआ था।
राहुल गांधी ने चेन्नई में यह आरोप भी लगाया कि केंद्र सरकार हिंदी थोपने की कोशिश कर रही है और तमिल भाषा, इतिहास तथा परंपराओं को कमतर दिखाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह तमिल संस्कृति पर व्यापक हमला है।
कांग्रेस नेता ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत तमिलनाडु को मिलने वाली 3,300 करोड़ रुपये की राशि रोके जाने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि राज्य को उसका हक नहीं दिया जा रहा है।
गांधी ने नीट (राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा) का उल्लेख करते हुए दावा किया कि इसके कारण एमबीबीएस की सीटों में तमिल माध्यम के विद्यार्थियों की हिस्सेदारी में 87 प्रतिशत की गिरावट आई है।
उन्होंने राज्य के विश्वविद्यालयों में कुलपतियों की नियुक्तियों को लेकर भी राज्यपाल पर निशाना साधा।
गांधी ने आरोप लगाया कि राज्य के 70 प्रतिशत विश्वविद्यालयों में कुलपति नहीं हैं और इसके पीछे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े लोगों को विश्वविद्यालयों में प्रभावशाली पदों पर लाने की मंशा है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भय, नफरत तथा विभाजन की राजनीति के जरिए इन कदमों को आगे बढ़ा रहे हैं।
गांधी ने इस बात पर जोर दिया, ''हम नरेन्द्र मोदी को तमिल भाषा, इतिहास और संस्कृति पर हमला नहीं करने देंगे। हम तमिलनाडु को हाथ नहीं लगाने देंगे।''
उन्होंने कहा कि शिक्षा में सवाल पूछने और जिज्ञासा को बढ़ावा देना जरूरी है, लेकिन सरकार की नीतियां छात्रों की सोच को दबा रही हैं।
भाषा हक अविनाश दिलीप
दिलीप