Breaking News

यूपी-बिहार, कर्नाटक, महाराष्ट्र में आज आएंगे MLC चुनाव के नतीजे     |   इजरायल में आम चुनाव आज, होगी वोटिंग     |   गुवाहाटी के होटल में हुई फायरिंग में इस्तेमाल हथियार जब्त, 5 की मौत     |   चक्रवात 'ऑर्नब' को लेकर आंध्र प्रदेश में अलर्ट, भारी बारिश की आशंका     |   यूक्रेन की राजधानी कीव में जबरदस्त धमाका, कल रूस ने भी किया था अटैक     |  

एनपीपीए ने स्वास्थ्य मंत्रालय को कैंसर दवाओं पर अधिकतम 30 प्रतिशत मुनाफा लेने के निर्देश दिए: मंत्री

बेंगलुरु, 10 अक्टूबर (भाषा) कर्नाटक के स्वास्थ्य मंत्री यू टी खादर ने शनिवार को कहा कि राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (एनपीपीए) ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को कैंसर की उन दवाओं की सूची और उनके लाभ के अंतर का ब्योरा सौंपने का निर्देश दिया है, जिन पर अधिकतम लाभ 30 प्रतिशत तक सीमित किया जाना है।

खादर ने इसे ऐतिहासिक दिन बताते हुए कहा कि मरीजों और उनके परिजनों को चिकित्सा उपचार उपलब्ध कराने में होने वाली कठिनाइयों को दूर करने के स्वास्थ्य विभाग के प्रयासों के सकारात्मक परिणाम मिलने लगे हैं।

मंत्री ने संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘‘एनपीपीए ने स्वास्थ्य मंत्रालय को 14 अक्टूबर तक संबंधित कैंसर दवाओं की सूची और उनके लाभ मार्जिन का ब्योरा सौंपने का निर्देश दिया है। इन दवाओं पर लाभ 30 प्रतिशत तक सीमित किया जाना है।’’

मंत्री ने इसे एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम बताते हुए कहा कि अब तक दवाओं के पैकेट पर आम तौर पर केवल अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) दर्ज होता था, जिससे उपभोक्ताओं को दवाओं की वास्तविक लागत के बारे में बहुत कम जानकारी मिल पाती थी।

उन्होंने कहा कि इस कदम से मूल्य निर्धारण में अधिक पारदर्शिता आएगी और लोगों को दवाओं की कीमतों को समझने में मदद मिलेगी। साथ ही, निर्धारित सीमा से अधिक लाभ वसूलने वाली कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई करना संभव होगा।

खादर ने कहा, ‘‘यदि लाभ 30 प्रतिशत तक सीमित करने की व्यवस्था लागू होती है, तो कई महंगी दवाओं की कीमतें काफी कम हो सकती हैं। तीन हजार रुपये की कुछ दवाएं 25 हजार रुपये में बेची जाती हैं, जबकि एक अन्य मामले में पांच हजार रुपये की बताई गई लागत वाला इंजेक्शन 65 हजार रुपये में बेचा जा रहा था।’’

उन्होंने कहा कि कैंसर के उपचार में अक्सर कई इंजेक्शन लगाने पड़ते हैं। कभी-कभी इनकी संख्या 10 या 12 तक होती है, जिससे इलाज का कुल खर्च कई लाख रुपये तक पहुंच जाता है। उन्होंने कहा कि इन कीमतों पर नियंत्रण से मरीजों पर पड़ने वाला आर्थिक बोझ काफी कम होगा।

खादर ने कहा कि पदभार संभालने के एक महीने के भीतर ही उन्होंने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री को पत्र लिखकर कैंसर की दवाओं की अत्यधिक कीमतों का मुद्दा उठाया था और उन्हें राष्ट्रीय औषधि मूल्य नियमन के दायरे में लाने के लिए कदम उठाने का अनुरोध किया था।

मंत्री ने कहा कि उनके इस प्रयास के अब परिणाम मिलने लगे हैं।

भाषा शफीक नेत्रपाल

नेत्रपाल