(सागर कुलकर्णी)
नयी दिल्ली, 10 अक्टूबर (भाषा) अमेरिका के स्थायी श्रम प्रमाणन कार्यक्रम से निलंबन का सामना कर रही भारतीय आईटी (सूचना प्रौद्योगिकी) कंपनियों ने इस साल ग्रीन कार्ड के लिए कम आवेदन किए हैं। इससे संकेत मिलता है कि अमेरिकी कार्रवाई का उनके कामकाज पर बहुत अधिक असर पड़ने की आशंका नहीं है।
अमेरिका ने बृहस्पतिवार को टाटा, इन्फोसिस, विप्रो और एचसीएल समेत आठ आईटी कंपनियों को विदेशी कर्मचारियों के लिए ग्रीन कार्ड आवेदन करने वाले कार्यक्रम से निलंबित कर दिया था। अमेरिकी प्रशासन का आरोप है कि इस प्रक्रिया के कारण अमेरिकी नागरिकों के लिए रोजगार के अवसर कम हुए हैं।
अन्य कंपनियों में कैपजेमिनी, कॉग्निजेंट, माइक्रोसॉफ्ट और एडोबी शामिल हैं। ये कंपनियां बड़ी संख्या में भारत के पेशेवरों को रोजगार देती हैं।
स्थायी श्रम प्रमाणन (पीईआरएम) आवेदनों के विश्लेषण के अनुसार, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) ने अमेरिकी वित्त वर्ष 2026 में केवल दो आवेदन किए, जबकि 2025 में 513 और 2024 में 1,804 आवेदन किए गए थे। वहीं, एचसीएल ने 2026 में 59 आवेदन किए, जबकि 2025 में यह संख्या 323 थी।
विप्रो ने 2024 में 257 और 2025 में 523 आवेदन किए थे। 2024 में किए गए 257 आवेदनों में से 169 खारिज कर दिए गए, जबकि कंपनी ने 88 आवेदन वापस ले लिए थे।
इन्फोसिस ने 2024 में पीईआरएम के तहत 87 आवेदन किए थे। वर्ष 2025 और 2026 के लिए कंपनी के आवेदन संबंधी आंकड़े उपलब्ध नहीं थे।
एचसीएल टेक्नोलॉजीज के पूर्व मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) विनीत नायर ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, “पिछले साल जारी किए गए 1,17,849 पीईआरएम प्रमाणपत्रों में भारतीय आईटी कंपनियों की हिस्सेदारी 1,400 से भी कम थी। यह दो प्रतिशत से कम है। इसलिए इसका प्रत्यक्ष प्रभाव शुरुआती अनुमान से कम हो सकता है।”
पीईआरएम ट्रैकर वेबसाइट के अनुसार, कैपजेमिनी ने 2026 में 98 आवेदन किए, जबकि 2025 में 361 और 2024 में 300 आवेदन किए थे। कॉग्निजेंट ने 2024 में 1,236 आवेदन किए थे। कंपनी के 2025 और 2026 के आंकड़े उपलब्ध नहीं थे।
अमेरिका के श्रम विभाग की ओर से जारी स्थायी श्रम प्रमाणन किसी नियोक्ता को विदेशी कर्मचारी को अमेरिका में स्थायी रूप से काम पर रखने की अनुमति देता है। कार्य वीजा पर अमेरिका में काम कर रहे पेशेवरों के लिए पीईआरएम आवेदन ग्रीन कार्ड यानी स्थायी निवास हासिल करने की प्रक्रिया का पहला कदम माना जाता है।
भाषा यासिर पाण्डेय
पाण्डेय