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वैश्विक निर्णय प्रक्रिया में भारत, अफ्रीका को कम प्रतिनिधित्व मंजूर नहीं: जयशंकर

(फोटो सहित)

अदीस अबाबा, 10 अक्टूबर (भाषा) विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा है वैश्विक स्तर पर फैसले लेने की प्रक्रिया में भारत और अफ्रीका का प्रतिनिधित्व कम नहीं रह सकता। उन्होंने वैश्विक शासन को अधिक लोकतांत्रिक और प्रतिनिधित्व वाला बनाने के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार का आह्वान किया।

जयशंकर ने शुक्रवार को अदीस अबाबा स्थित अदवा विजय स्मारक संग्रहालय में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि मौजूदा वैश्विक व्यवस्था भारत और अफ्रीका, दोनों के हितों की अनदेखी करती है। उन्होंने कुछ अज्ञात ताकतों पर सुधारों में देरी करने का आरोप भी लगाया।

विदेश मंत्री ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की सदस्यता में अफ्रीका को उचित प्रतिनिधित्व देने का आह्वान करते हुए कहा, ‘‘मौजूदा सुरक्षा परिषद न तो प्रभावी ढंग से काम करती है और न ही सभी का उचित प्रतिनिधित्व करती है। ये दोनों कमियां स्पष्ट रूप से एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं।’’

जयशंकर तीन देशों की अपनी अफ्रीका यात्रा के अंतिम चरण में बृहस्पतिवार को कोटे डी आइवर से इथियोपिया पहुंचे। इस यात्रा में घाना भी शामिल था।

अधिक प्रतिनिधित्व वाली अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था की वकालत करते हुए जयशंकर ने 2023 में भारत की जी20 अध्यक्षता के दौरान अफ्रीकी संघ को स्थायी सदस्यता दिलाने के प्रयासों का उल्लेख किया। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की दोनों श्रेणियों की सदस्यता में अफ्रीका को उचित प्रतिनिधित्व देने की मांग की।

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में 15 सदस्य हैं। इनमें पांच स्थायी सदस्य- चीन, फ्रांस, रूस, ब्रिटेन और अमेरिका शामिल हैं। इन पांचों के पास वीटो का अधिकार है, जिसके तहत इनमें से कोई भी देश किसी महत्वपूर्ण प्रस्ताव को रोक सकता है।

शेष 10 अस्थायी सदस्य दो साल के कार्यकाल के लिए चुने जाते हैं और उनके पास वीटो का अधिकार नहीं होता। सुरक्षा परिषद में सुधार की मांगों में इसकी सदस्यता का विस्तार करना भी शामिल है, ताकि भारत, अफ्रीका और अन्य कम प्रतिनिधित्व वाले क्षेत्रों को वैश्विक निर्णय प्रक्रिया में अधिक भूमिका मिल सके।

जयशंकर ने कहा कि भारत अफ्रीका का चौथा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है और दोनों के बीच व्यापार लगभग 100 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया है। उन्होंने कहा कि पूरे अफ्रीका में भारत के सहयोग से करीब 4.5 अरब डॉलर की लागत वाली 220 से अधिक विकास परियोजनाएं पूरी की जा चुकी हैं।

विदेश मंत्री ने कहा कि अदवा में इथियोपिया की इटली पर जीत ने अफ्रीका और दुनिया के अन्य हिस्सों में उपनिवेशवाद तथा नस्लीय वर्चस्व के खिलाफ संघर्षों को प्रेरित किया था। उन्होंने कहा कि यह जीत भारत के स्वतंत्रता आंदोलन से भी जुड़ती है, क्योंकि दोनों संघर्षों का केंद्र मानवीय गरिमा, राजनीतिक स्वतंत्रता और संप्रभु फैसले लेने का अधिकार था।

भाषा आशीष नेत्रपाल

नेत्रपाल