लातूर (महाराष्ट्र), 10 अक्टूबर (भाषा) कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के शीर्ष नेतृत्व को हिरासत में लिए जाने के बाद महाराष्ट्र के लातूर जिले के निवासी अजिंक्य शिंदे चर्चा में आ गए हैं और उन्हें जंतर-मंतर पर कॉजपा के आंदोलन के अगले चरण का नेतृत्व करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
कॉजपा के संगठन प्रभारी शिंदे ने शनिवार को ‘जंतर-मंतर 2.0’ प्रदर्शन की कमान संभाली। दीपके ने उन्हें और दो अन्य नेताओं के हिरासत में रहने तक मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन का नेतृत्व करने के लिए शिंदे को चुना है।
दीपके और कॉजपा के दो अन्य नेताओं सौरव दास तथा आशुतोष रांका को शनिवार को मुंबई से आये विमान के राष्ट्रीय राजधानी पहुंचते ही दिल्ली पुलिस ने हिरासत में ले लिया। वे प्रदर्शन का नेतृत्व करने के लिए दिल्ली पहुंचे थे।
शिंदे (35) महाराष्ट्र के लातूर जिले की औसा तहसील के उजनी गांव के रहने वाले हैं। उन्होंने कंप्यूटर इंजीनियर के रूप में अपना करियर छोड़कर सामाजिक और राजनीतिक सक्रियता का रास्ता चुना।
शिंदे के मित्र सूरज धवन ने बताया कि अब उनसे संगठन के आंदोलन को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाने की उम्मीद है।
धवन ने कहा कि अन्ना हजारे के भ्रष्टाचार-रोधी आंदोलन और अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाले अभियान से प्रेरित होकर शिंदे धीरे-धीरे अपने पेशेवर करियर से दूर हुए और सार्वजनिक जीवन में सक्रिय हो गए।
शिंदे के पिता सेवानिवृत्त शिक्षक हैं।
धवन ने बताया कि शिंदे ने कंप्यूटर इंजीनियर के रूप में अपना पेशेवर सफर शुरू किया था, लेकिन देश की राजनीतिक और सामाजिक स्थिति को लेकर उनकी चिंता बढ़ती गई। उन्होंने बताया कि लोकपाल की मांग को लेकर हुए आंदोलन और हजारे तथा केजरीवाल के नेतृत्व वाले अभियानों ने शिंदे की सोच को आकार दिया और उन्हें बदलाव लाने के प्रयासों में सीधे तौर पर शामिल होने के लिए प्रेरित किया।
धवन के अनुसार, शिंदे का मानना था कि व्यवस्था की आलोचना करना ही पर्याप्त नहीं है। इसलिए उन्होंने अपनी नौकरी से इस्तीफा दे दिया और सामाजिक तथा राजनीतिक सक्रियता का रास्ता चुना।
इसके बाद शिंदे आम आदमी पार्टी (आप) में सक्रिय हुए। उन्होंने महाराष्ट्र में पार्टी के प्रदेश युवा अध्यक्ष के रूप में काम किया और बाद में गोवा में पार्टी की संगठनात्मक गतिविधियों के प्रभारी की जिम्मेदारी संभाली।
धवन ने बताया कि महाराष्ट्र और गोवा में पार्टी संगठन खड़ा करने का अनुभव हासिल करने के बाद शिंदे ने ‘आप’ छोड़ दी और कॉजपा में शामिल हो गए।
भाषा शफीक नरेश
नरेश