नयी दिल्ली, 10 अक्टूबर (भाषा) दिल्ली की एक अदालत ने शनिवार को आम आदमी पार्टी (आप) से निष्कासित पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन को 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से जुड़े दयालपुर क्षेत्र के एक मामले में दंगा भड़काने का दोषी ठहराया, जबकि 12 अन्य आरोपियों को सभी आरोपों से बरी कर दिया।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रवीण सिंह ने हुसैन को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 147 (दंगा करने के लिए दंड) के साथ धारा 109 (दुष्प्रेरण) के तहत दोषी ठहराया। हालांकि, अदालत ने उसे अन्य आरोपों से बरी कर दिया।
हुसैन को फरवरी 2020 में आप से निष्कासित कर दिया गया था। उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों में उसकी संलिप्तता को लेकर प्राथमिकी दर्ज होने के कुछ घंटे बाद यह कार्रवाई की गई थी। वह 2024 में असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) में शामिल हो गया था। इसके बाद उसने 2025 का दिल्ली विधानसभा चुनाव एआईएमआईएम के टिकट पर लड़ा था, लेकिन हार गया था।
अदालत ने हुसैन को दी जाने वाली सजा की अवधि पर दलीलें सुनने के लिए मामले की सुनवाई 16 नवंबर को तय की। विस्तृत आदेश आना बाकी है।
इस मामले में 13 लोग आरोपी थे। इनमें हुसैन के अलावा मोहम्मद शादाब, शाह आलम, रियासत अली, गुलफाम, राशिद, मोहम्मद रिहान, मोहम्मद आबिद, अरशद कय्यूम, इरशाद अहमद, दीपक सिंह सैनी, नवनीत और महक सिंह शामिल हैं।
सभी आरोपियों पर दंगा करने, संपत्ति को नुकसान पहुंचाने, आग लगाकर नुकसान पहुंचाने और आपराधिक साजिश समेत अन्य अपराधों के आरोप लगाए गए थे।
अदालत ने हुसैन के 12 सह-आरोपियों को सभी आरोपों से बरी कर दिया, जबकि पूर्व पार्षद को दो आरोपों में दोषी ठहराया और बाकी आरोपों से बरी कर दिया।
जुलाई में दिल्ली की एक अदालत ने 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के दौरान खुफिया ब्यूरो के अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या से जुड़े एक मामले में हुसैन और चार अन्य लोगों को दोषी ठहराया था।
यह मामला दयालपुर थाने में दर्ज उस प्राथमिकी से संबंधित था, जो शर्मा के पिता रविंदर कुमार की शिकायत पर दर्ज की गई थी। इस मामले में नाम सामने आने के बाद आम आदमी पार्टी ने हुसैन को निलंबित कर दिया था।
फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में भड़के दंगों में 53 लोगों की मौत हुई थी, कई अन्य घायल हुए थे और संपत्ति को बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचा था।
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रंजन नेत्रपाल
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