श्रीनगर, 10 अक्टूबर (भाषा) पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने शनिवार को केंद्र की भाजपा नीत सरकार पर आरोप लगाया कि वह ‘जबरन थोपी गई खामोशी’ को सहमति के रूप में पेश कर रही है। उन्होंने दिल्ली में कड़े सुरक्षा प्रतिबंधों की तुलना, 2019 में अनुच्छेद 370 निरस्त किए जाने के बाद कश्मीर में लगाए गए प्रतिबंधों से की।
महबूबा की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब दिल्ली में सुरक्षा प्रतिबंध कड़े कर दिए गए हैं, कई मार्ग बंद कर दिए गए हैं और रेल सेवाएं बाधित हुई हैं। आरोप है कि ये कदम मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन करने के लिए जंतर-मंतर की ओर मार्च कर रहे लोगों को रोकने के उद्देश्य से उठाए गए हैं।
महबूबा ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ''आज की दिल्ली, अनुच्छेद 370 को असंवैधानिक तरीके से निरस्त किए जाने के बाद के कश्मीर की स्थिति की याद दिलाती है। उस समय लोगों को घरों में कैद कर दिया गया था, इंटरनेट बंद कर दिया गया था और पूरे क्षेत्र की घेराबंदी कर दी गई थी। इसके बाद भाजपा ने बेशर्मी से दावा किया था कि किसी ने विरोध प्रदर्शन नहीं किया।''
जम्मू कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि विरोध-प्रदर्शन को 'कुचलने' के बाद, सत्ताधारी पक्ष यह दावा करेगा कि कोई विरोध-प्रदर्शन नहीं हुआ था।
उन्होंने कहा, ''आज दिल्ली की घेराबंदी कर दी गई है, ट्रेन सेवाएं रोक दी गई हैं और जंतर-मंतर जाने वाले रास्ते बंद कर दिए गए हैं। ऐसे में वे फिर वही झूठ दोहराते हुए दावा कर सकते हैं कि ज्ञानेश कुमार के खिलाफ किसी ने प्रदर्शन नहीं किया। पहले विरोध-प्रदर्शन को कुचलो और फिर इससे इनकार कर दो कि ऐसा कभी हुआ भी था। इसी तरह जबरन थोपी गई खामोशी को सहमति के रूप में पेश किया जाता है।''
भाषा
प्रचेता पवनेश
पवनेश