नयी दिल्ली, 10 अक्टूबर (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार से दिव्यांगजन की सहायता के लिए प्रशिक्षित सहायक कुत्तों के इस्तेमाल संबंधी मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) को अंतिम रूप देने को कहा है।
न्यायमूर्ति दिनेश मेहता और न्यायमूर्ति अदिति चौधरी की पीठ ने कहा कि उसे उम्मीद है कि अधिकारी इस मामले में अगली सुनवाई की तारीख सात जनवरी, 2027 तक एसओपी को अंतिम रूप दे देंगे।
अदालत ने धनंजय संजोगता फाउंडेशन की उस याचिका पर सुनवाई के दौरान यह निर्देश दिया जिसमें दिव्यांग व्यक्तियों की सहायता के लिए ‘थेरेपी’ या अन्य सहायक पशुओं के इस्तेमाल संबंधी नियमों का कोई ढांचा नहीं होने का मुद्दा उठाया गया है।
पशुपालन एवं डेयरी विभाग और दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग के वकील ने छह अक्टूबर को सुनवाई के दौरान ‘भारत में दिव्यांगजन की सहायता के लिए सहायक कुत्तों’ के संबंध में तैयार एसओपी का मसौदा अदालत के समक्ष पेश किया था।
वकील ने बताया था कि इस मसौदे पर आम लोगों और सभी संबंधित पक्षों से आपत्तियां मांगी गई हैं तथा एसओपी को जल्द ही अंतिम रूप दे दिया जाएगा।
एसओपी में कुछ सुझाव शामिल करने की बात भी सामने आई। इनमें सहायक कुत्तों का एक रजिस्टर तैयार करना और प्रत्येक कुत्ते को पंजीकरण संख्या देना शामिल है।
यह भी सुझाव दिया गया कि सभी सहायक कुत्तों के गले में पहले से निर्धारित रंग का एक विशेष पट्टा होना चाहिए, ताकि आम लोग एवं सुरक्षाकर्मी उन्हें पहचान सकें और यह समझ सकें कि ये सहायता के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले कुत्ते हैं तथा इनसे किसी तरह का नुकसान होने की आशंका नहीं है।
इसके अलावा, यह सुझाव दिया गया कि सिनेमाघरों, मॉल और अस्पतालों जैसे भीड़भाड़ वाले स्थानों पर ले जाते समय इन कुत्तों के मुंह पर सुरक्षा के लिए जालीदार पट्टा लगाया जाए, ताकि शांति और व्यवस्था बनी रहे।
केंद्र सरकार के वकील ने अदालत को आश्वासन दिया कि इन सुझावों पर विचार करने और इन्हें एसओपी में शामिल करने के लिए संबंधित अधिकारियों को भेजा जाएगा।
संगठन ने 2024 में एक जनहित याचिका दायर कर पशु जन्म नियंत्रण नियम, 2023 को चुनौती दी थी। याचिका में दलील दी गई थी कि इन नियमों में दिव्यांग व्यक्तियों को आवारा पशुओं के हमलों से बचाने के लिए कोई व्यवस्था नहीं की गई है और ये दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 का उल्लंघन करते हैं।
भाषा सिम्मी पवनेश
पवनेश