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उच्चतम न्यायालय ने न्यायिक कल्याण के लिए स्थायी समिति का गठन किया

नयी दिल्ली, 10 अक्टूबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने न्यायिक अधिकारियों के पेशेवर और व्यक्तिगत कल्याण पर असर डालने वाले मुद्दों की पहचान करने और उनके समाधान के लिए एक व्यवस्थित संस्थागत तंत्र उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शनिवार को एक स्थायी समिति का गठन किया।

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने इस समिति का गठन किया है, जिसकी अध्यक्षता उच्चतम न्यायालय के मौजूदा न्यायाधीश के.वी. विश्वनाथन करेंगे।

शीर्ष अदालत ने एक बयान में कहा, ‘‘देश भर के न्यायिक अधिकारियों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य कल्याण के लिए एक अहम पहल के तहत, भारत के प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के मौके पर उच्चतम न्यायालय की देखरेख में न्यायिक कल्याण को लेकर एक स्थायी समिति का गठन किया है।’’

न्यायमूर्ति विश्वनाथन की अध्यक्षता वाली समिति के सदस्यों में पीजीआईएमईआर चंडीगढ़ की पूर्व डीन और मनोचिकित्सा विभाग की प्रमुख डॉ. सविता मल्होत्रा​​, मनोवैज्ञानिक और स्वचेतन सोसाइटी फॉर मेंटल हेल्थ के निदेशक एवं सह-संस्थापक रजत मित्रा, शीर्ष अदालत में ‘एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड’ मृणाल कंवर तथा सेंटर फॉर रिसर्च एंड प्लानिंग में रजिस्ट्रार (जे) आरती सिंह शामिल हैं।

शीर्ष अदालत ने एक बयान में कहा कि यह पहल एक असरदार, स्वतंत्र और टिकाऊ न्याय व्यवस्था के लिए न्यायिक कल्याण को एक आवश्यकता के तौर पर मान्यता देने की दिशा में एक अहम कदम है।

बयान में कहा गया है कि न्यायिक अधिकारी मुश्किल हालात में अपनी जिम्मेदारियां निभाते हैं। अक्सर उन्हें काम का बोझ, लंबे समय तक काम करना, मुश्किल फ़ैसले लेना, प्रशासनिक दबाव और भावनात्मक रूप से चुनौतीपूर्ण व संवेदनशील स्थिति का सामना करना पड़ता है।

इसमें कहा गया है कि यह विषय न्याय-प्रशासन की दक्षता, गुणवत्ता और निरंतरता से भी गहराई से जुड़ी हुई है।

भाषा सुभाष दिलीप

दिलीप