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शांतिपूर्ण प्रदर्शन के लिए दिल्ली जा रहे लोगों के खिलाफ कार्रवाई ‘कायरतापूर्ण’: सुप्रिया सुले

मुंबई, 10 अक्टूबर (भाषा) राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की नेता एवं सांसद सुप्रिया सुले ने शनिवार को ‘‘शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल होने के लिए दिल्ली जा रहे लोगों के खिलाफ कार्रवाई’’ की आलोचना करते हुए इसे सरकार का ‘‘कायरतापूर्ण’’ कदम बताया और स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए व्यापक चुनाव सुधारों की मांग की।

सुले ने यहां ‘इंडिया टुडे कॉन्क्लेव’ में कहा कि सरकार को मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे लोगों पर पाबंदियां लगाने के बजाय उनसे बातचीत करनी चाहिए थी।

उन्होंने कहा, ‘‘मैं इस कार्रवाई की निंदा करती हूं क्योंकि यह पूरी तरह शांतिपूर्ण प्रदर्शन था। वे दिल्ली में प्रदर्शन में हिस्सा लेने जा रहे थे और व्यक्तिगत तौर पर मेरा मानना है कि किसी भी सरकार का ऐसा करना कायरतापूर्ण है। यह एक कड़ा शब्द है, लेकिन यह कायरतापूर्ण कदम है।’’

यह दलील दिए जाने पर कि किसी भी अप्रिय घटना को रोकना और कानून-व्यवस्था बनाए रखना सरकार की जिम्मेदारी है, राकांपा (शप) की कार्यकारी अध्यक्ष ने कहा कि अधिकारी बातचीत के जरिए स्थिति को संभाल सकते थे।

उन्होंने देश में व्यापक चुनाव सुधारों की जरूरत पर भी जोर देते हुए कहा कि यह मुद्दा किसी खास पार्टी की हार या जीत का नहीं है।

उन्होंने महाराष्ट्र के पुणे जिले की खड़कवासला विधानसभा सीट का उदाहरण देते हुए मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया के बाद मतदाताओं की संख्या में आए बदलाव पर सवाल उठाए और इससे संबंधित आंकड़े उपलब्ध कराने की मांग की।

सुले ने बारामती लोकसभा क्षेत्र में भी मतदाताओं की संख्या में आई गिरावट पर सवाल उठाए और कहा कि अधिकारियों को आंकड़े उपलब्ध कराने चाहिए, ताकि इन बदलावों की उचित जांच की जा सके।

उन्होंने सवाल उठाया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) चुनाव सुधारों पर चर्चा के लिए अन्य दलों से संपर्क क्यों नहीं कर रही। उन्होंने कहा कि विपक्षी दल चुनाव प्रक्रिया से जुड़ी चिंताओं को दूर करने के लिए चर्चा और विधायी कार्यवाही में हिस्सा लेने को तैयार हैं।

उन्होंने कहा कि यदि चुनाव सुधारों के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी फिर से सत्ता में आते हैं, तो विपक्ष चुनाव परिणाम स्वीकार करने को तैयार होगा, बशर्ते चुनाव स्वतंत्र और निष्पक्ष हों।

विपक्षी गठबंधन ‘इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इन्क्लूसिव अलायंस’ (इंडिया) के भविष्य और इसमें कांग्रेस की प्रमुख सहयोगी की भूमिका के बारे में पूछे जाने पर सुले ने कहा कि अभी यह अनुमान लगाना जल्दबाजी होगी कि राजनीतिक समीकरण किस तरह बदलेंगे।

यह पूछे जाने पर कि क्या उनके पिता और राकांपा (शप) प्रमुख शरद पवार के कांग्रेस में लौटने की संभावना है, सुले ने कहा कि वह उनकी ओर से कुछ नहीं कह सकतीं।

सुले ने ‘‘देश में भय का माहौल होने को लेकर’’ भी चिंता जताई और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) एवं केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) जैसी केंद्रीय एजेंसियों की जांच के नतीजों पर सवाल उठाए।

उन्होंने राजनीतिक दलों के बीच ‘‘स्वस्थ’’ संवाद की वकालत करते हुए कहा कि उनकी पार्टी और शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) ‘इंडिया’ में द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) को शामिल करने की इच्छुक हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘हम द्रमुक और उद्धव ठाकरे के साथ बातचीत कर रहे हैं। राकांपा (शप) और शिवसेना (उबाठा), दोनों द्रमुक के साथ बातचीत कर रही हैं। हम चाहते हैं कि वे ‘इंडिया’ गठबंधन में हमारे साथ हों।’’

राकांपा (शप) और सरकार के बीच पर्दे के पीछे बातचीत होने की अटकलों पर सुले ने कहा कि लोकतंत्र में संवाद जरूरी है।

प्रधानमंत्री मोदी की प्रस्तावित बारामती यात्रा और दिसंबर में महिलाओं से जुड़े एक कार्यक्रम के लिए उनकी पार्टी की ओर से कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाद्रा को दिए गए निमंत्रण का जिक्र करते हुए सुले ने कहा कि अलग-अलग राजनीतिक दलों के नेता किसी साझा उद्देश्य के लिए एक-दूसरे से संपर्क कर सकते हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘हमने दिसंबर में महिलाओं से जुड़े एक बहुत बड़े मुद्दे पर आयोजित कार्यक्रम के लिए प्रियंका गांधी को आमंत्रित किया है।’’

सुले ने बताया कि यह कार्यक्रम 16 दिसंबर को निर्धारित है, लेकिन प्रियंका इसमें शामिल नहीं हो पाएंगी।

उन्होंने कहा, ‘‘स्वस्थ संवाद में क्या गलत है? इसका यह मतलब नहीं है कि आप साथ मिलकर काम कर रहे हैं।’’

प्रस्तावित परिसीमन प्रक्रिया के बारे में सुले ने कहा कि ‘इंडिया’ गठबंधन प्रस्तावित विधेयक का अध्ययन करने के बाद सामूहिक फैसला करेगा।

सुले ने इस बात को खारिज कर दिया कि महाराष्ट्र में विपक्ष कमजोर है या उसके पास मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को चुनौती देने के लिए कोई विश्वसनीय चेहरा नहीं है।

उन्होंने कहा, ‘‘मैं आपसे बिल्कुल सहमत नहीं हूं।’’

सुले ने आरोप लगाया कि भाजपा के नेतृत्व वाले गठबंधन की मौजूदा स्थिति प्रतिद्वंद्वी दलों में टूट और केंद्रीय एजेंसियों के इस्तेमाल का नतीजा है।

सुले ने आर्थिक मामलों में राज्य सरकार के प्रदर्शन की आलोचना की और आरोप लगाया कि ठेकेदारों के बकाये और वेतन के भुगतान में देरी हो रही है। उन्होंने महंगाई, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार को प्रमुख चिंताएं बताया।

यह पूछे जाने पर कि क्या कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) का मौजूदा आंदोलन अन्ना हजारे के आंदोलन जैसा है, सुले ने कहा, ‘‘मुझे नहीं लगता कि यह अन्ना आंदोलन जैसा है। विरोध का तरीका अलग है, लेकिन लोगों की भावनाएं काफी हद तक वैसी ही हैं।’’

सुले ने कहा कि ‘जेन जी’ जवाबदेही और स्पष्ट संदेश चाहती है तथा सभी को ‘‘नियमों के अनुसार’’ चलना होगा।

भाषा सिम्मी रंजन

रंजन