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कॉलेज की जमीन से तीन महीने में अवैध कब्जे हटवाएं लखनऊ के डीएम : इलाहाबाद उच्च न्‍यायालय

लखनऊ, 10 अक्टूबर (भाषा) इलाहाबाद उच्‍च न्‍यायालय की लखनऊ पीठ ने लखनऊ के जिलाधिकारी (डीएम) को निर्देश दिया है कि वह तीन महीने के अंदर यहां तेलीबाग इलाके में स्थित 'राम भरोसे मैकू लाल इंटर कॉलेज' की जमीन से सभी अवैध कब्ज़े हटाएं।

पीठ ने यह भी साफ़ किया कि कब्जा करने वालों में से एक व्यक्ति उत्तर प्रदेश के वित्त मंत्री का जनसंपर्क अधिकारी (पीआरओ) है, लेकिन इस बात का डीएम के काम पर कोई असर नहीं पड़ना चाहिए।

यह आदेश न्यायमूर्ति पंकज भाटिया की एकल पीठ ने कॉलेज की प्रबंध समिति की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया है।

न्यायमूर्ति भाटिया ने लखनऊ के डीएम को आदेश का पूरी तरह पालन करने और तीन महीने के अंदर अपने निजी हस्ताक्षर वाली अनुपालन रिपोर्ट जमा करने का निर्देश दिया।

पीठ ने आगाह किया कि कि बेदखली की कार्यवाही में कॉलेज के पूर्व प्रधानाचार्य और वित्त मंत्री के पीआरओ सुखपाल सिंह के किसी भी तरह के दखल को गंभीरता से लिया जाएगा। अदालत ने यह भी कहा कि आदेश की एक प्रति वित्त मंत्री को भेजी जाए।

प्रबंध समिति ने आरोप लगाया कि सिंह ने 1988 से 31 जनवरी 2017 तक कॉलेज के प्रधानाचार्य के तौर पर काम करते हुए मकान किराया भत्ता लिया था। समिति ने उस रकम की वसूली की मांग की और आरोप लगाया कि सेवानिवृत्त होने के बाद भी सिंह प्रधानाचार्य के सरकारी आवास में रहते रहे। समिति ने अवैध कब्जे की अवधि के लिए मौजूदा दर से किराया वसूलने की भी मांग की।

अदालत में पेश की गई राज्य सरकार की रिपोर्ट में कहा गया है कि जब कॉलेज को मान्यता मिली थी, तब प्रबंध समिति ने गाटा नंबर 41 और 44 की जमीन को संस्थान की संपत्ति के तौर पर पहचाना था।

इस ज़मीन में स्कूल का भवन, प्रधानाचार्य का कार्यालय, स्कूल का कार्यालय, दूसरी इमारतें और खाली ज़मीन शामिल थी। रिपोर्ट से पता चला कि इस संपत्ति के अलग-अलग हिस्सों पर अलग-अलग लोगों ने कब्जा कर रखा था।

पीठ ने शुरुआती तौर पर पाया कि कई लोग उस ज़मीन पर कब्जा किए हुए थे जो कॉलेज की संपत्ति के तौर पर दर्ज थी। यह भी पाया गया कि सिंह सेवानिवृत्ति के बाद भी प्रधानाचार्य के घर में रह रहे थे।

हालांकि सुखपाल सिंह की ओर से उनके वकील ने दलील दी कि संबंधित संपत्ति पर उनके दादा का कब्जा था और वह उत्तराधिकार के आधार पर वहां रह रहे हैं। लेकिन वह अपने दावे के समर्थन में कोई दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सके।

न्यायालय ने जिलाधिकारी को निर्देश दिया कि मान्यता प्रदान किए जाने के समय कॉलेज की संपत्ति के रूप में दर्शाई गई भूमि से सभी अनधिकृत कब्जे हटवाए जाएं और यदि सुखपाल सिंह भी संस्था की भूमि पर कब्जे में पाए जाते हैं, तो उनका कब्जा भी हटाया जाए।

न्यायालय ने आदेश की प्रति वित्त मंत्री को भी भेजने का निर्देश दिया है।

भाषा सं आनन्द जोहेब

जोहेब